उल्लेखनीय है कि डेढ़ महीने के भीतर इस तरह का यह चौथा मामला है। गाड़ापारली पंचायत से दो और रैला पंचायत से महिला को भी कुर्सी में उठाकर सड़क तक पहुंचाया गया था। बीते दिनों पोलियो की दवा पिलाने जा रही आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की बर्फीले रास्ते में फिसलकर खाई में गिरने से जान जा चुकी है।
बावजूद इसके सरकार और प्रशासन खामोश हैं। सुनीता के पति देवेंद्र कुमार, पंचायत प्रधान भाग चंद, उप प्रधान गोपाल आदि ने कहा कि आजादी के 73 साल बाद भी ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। सैंज घाटी के दूरस्थ गांव शुगाड़, शाक्टी, मरौड और कुटला को सड़क भी नसीब नहीं हुई है। लोग मरीजों को ही नहीं, अपनी रोजमर्रा की वस्तुओं को भी पीठ पर उठाकर लाने को मजबूर हैं।