थुनाग (मंडी)। सराज क्षेत्र में आपदा के थपेड़ों से उबरने के लिए ग्रामीण फिर उठ खड़े हुए हैं। बह गए पुलों की जगह ग्रामीण लकड़ी के पुल बनाने लगे हैं ताकि आवाजाही में दिक्कतें न आएं। बाढ़ में बहकर आई लकड़ी का इस्तेमाल किया जा रहा है। बूंगरैलचौक और चिऊणी में ग्रामीणों के सहयोग से सड़क और अस्थायी पुल का ढांचा तैयार हो रहा है। वन विभाग ने लकड़ी के पुल का कई स्थानों पर निर्माण करना शुरू कर दिया है।
प्राकृतिक आपदा ने बायला, भेखली, सुराह, उंधीगाड़, रेशन भलवाड़, जैंशला, थुनाग, झुंडी, बहलीधार, पखरैर, बूंगरैलचौक, संगलबाड़ा, ढीम कटारू, रोड, धार जरोल और चिऊणी पंचायतों में सैकड़ों पुलियों और फुटब्रिज को क्षतिग्रस्त किया है। इससे स्कूली बच्चों और ग्रामीणों का आवागमन ठप है। बायला, भेखली, वैयोड़, घीहड़ू, थरैनी, भलवाड़ और मझवाल जैसे क्षेत्रों में फुटब्रिज की तत्काल जरूरत है। इन क्षेत्रों में लोग नालों और दलदल को पार करने को मजबूर हैं। बच्चों को स्कूल और ग्रामीणों का बाजार, अस्पताल या अन्य जरूरी स्थानों तक पहुंचना जोखिम भरा हो गया है।
शिल्हीबागी, ब्रेयोगी और चिऊणी जैसे क्षेत्रों में स्थानीय पहल और वन विभाग के प्रयासों ने दिखाया है कि सीमित संसाधनों के साथ भी बड़ा बदलाव संभव है। जंजैहली क्षेत्र की बूंगरैलचौक पंचायत में तीन फुटब्रिज का निर्माण कार्य प्रगति पर है। स्थानीय निवासी रोशन लाल, चतर सिंह, मीरा, रेशमा आदि ने सरकार और वन विभाग से मांग की है कि इन पंचायतों में कम से कम 50 फुटब्रिज का निर्माण जल्द से जल्द किया जाए।
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बायला, भेखली, सुराह, उंधीगाड़ और रेशन भलवाड़ जैसे क्षेत्रों में बच्चे खतरनाक परिस्थितियों में नाले पार कर स्कूल जा रहे हैं। मनरेगा मजदूरों को शामिल कर फुटब्रिज निर्माण को और गति दी जा सकती है।
-रजनीश शर्मा, संयोजक, सराज आपदा सुझाव मंच
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विभाग ने आपदा में बहकर आई लकड़ी एकत्रित की है, जिसका उपयोग फुटब्रिज और वैली ब्रिज बनाने में किया जा रहा है। बायला, भेखली और सुराह में फुटब्रिज बनाने की संभावना तलाशी जाएंगी। विभाग स्थानीय लोगों की मांग को प्राथमिकता दे रहा है और उनके सहयोग से और ब्रिज बनाने की योजना है।
-सुरेंद्र कश्यप, वन मंडलाधिकारी नाचन
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