इसके बाद नई सरकार के आते ही विधानसभा के दूसरे सत्र में नूरपुर से भाजपा विधायक राकेश पठानिया ने केसीसी बैंक की जांच की मांग उठा दी। सरकार ने आश्वासन दिया कि मामले की जांच सीबीआई से कराई जाएगी, लेकिन इसे विजिलेंस को भेज दिया गया। अब विजिलेंस ने बैंक से पांच साल का रिकॉर्ड मांग लिया है।
सूत्रों की मानें तो विजिलेंस का सबसे ज्यादा फोकस लोन देने की प्रक्रिया और नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए) होने पर हुई कार्रवाई पर है। चूंकि, अब सरकार ने कांगड़ा बैंक की हर गतिविधि की जांच के लिए कहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में विजिलेंस अपनी जांच का दायरा बढ़ा सकती है।