राजधानी शिमला के लिए पानी की जरूरत असल में है कितनी? इस पर राज्य सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य मंत्री विद्या स्टोक्स ने मंगलवार को अधिकारियों को सही आंकड़ा बताने को कहा।
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‘अमर उजाला’ में छपी खबर ‘मंत्री गलत कह रही हैं या वेबसाइट झूठी’ पर विद्या स्टोक्स खूब तल्ख दिखीं। उन्होंने इसी तल्खी के बीच अधिकारियों को फोन मिलाने के आदेश दिए।
स्टोक्स ने सामने अखबार खोल रखी थी। मंगलवार..यह सवा तीन बजे की बात है। विद्या स्टोक्स के सबसे भरोसेमंद निजी सचिव आत्मा राम दूसरी ओर से फोन मिलाकर देते हैं और बताते हैं कि लाइन पर प्रमुख अभियंता आरके शर्मा हैं।
स्टोक्स ने फोन मिलाते ही पूछा कि सही क्या है? 33.75 एमएलडी सही है कि 42 एमएलडी सही है? प्रमुख अभियंता आरके शर्मा जवाब देते हैं - मैडम 33.75 एमएलडी ही सही है।
हम 40 एमएलडी की आपूर्ति कर रहे हैं। वेबसाइट पर क्या है, इसको चेक करते हैं। यह विशेष है कि दोपहर बाद भी वेबसाइट पर यह बात लिखी थी कि गर्मियों में शिमला को 42 एमएलडी पानी की जरूरत रहती है। इसमें यह भी लिखा हुआ था कि हालांकि 30 एमएमडी पानी ही मुहैया हो पाता है।
ये है मामला
राज्य सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य मंत्री विद्या स्टोक्स ने मंगलवार को बैठक के बाद पत्रकारों को कहा था कि राजधानी शिमला को 33.75 एमएलडी पानी की रोजाना की जरूरत है। उन्होंने कहा था कि विभाग 40 एमएलडी पानी की आपूर्ति कर रहा है। सभी स्रोतों से 45 एमएलडी पानी की आपूर्ति हो रही है।
हालांकि, आईपीएच विभाग की वेबसाइट पर http://hpiph.org/pws.htm लिंक में शिमला वाटर सप्लाई स्कीम को लेकर यह सूचना लिखी है कि गर्मियों में प्रतिदिन 42 मिलियन लीटर पानी की आपूर्ति की जरूरत होती है, जबकि 30 मिलियन लीटर पानी उपलब्ध है।