शिमला की ढली मंडी में सब्जी सीजन की बंपर शुरूआत हुई है। वीरवार को करसोग और ठियोग से मटर की खेप मंडी पहुंची। पहले ही दिन सब्जी उत्पादकों को उनकी फसल के बेहतरीन रेट मिले। मंडी में पहाड़ी मटर 40 से 50 रुपये किलो थोक रेट पर बिका। अच्छे दाम मिलने से किसान खासे उत्साहित नजर आए। शिमला की ढली मंडी में सब्जी सीजन की शुरूआत में ही किसानों को मटर के रिकाॅर्ड रेट मिले हैं।
इस बार मटर के सीजन की शुरूआत 50 रुपये किलो के साथ हुई है। वीरवार को 107 क्विंटल मटर मंडी पहुंचा। शिमला से मटर ऑन डिमांड सोलन, दिल्ली और मुंबई भेजा गया। ढली मंडी के आढ़ती नरेंद्र ठाकुर ने बताया कि इस साल सब्जी सीजन की बंपर शुरूआत हुई है। शुरूआत में ही हरा मटर 50 रुपये तक बिक रहा है। मुंबई से भी पहाड़ी मटर की डिमांड आ रही है।
ठियोग के चियोग से मटर लेकर मंडी पहुंचे महेश चंद ठाकुर ने बताया कि इस बार मटर की फसल पर सूखे की मार पड़ी है लेकिन सीजन की शुरूआत में मंडी में अच्छे दाम मिल रहे हैं। उम्मीद है आने वाले दिनों में भी मटर, गोभी के दाम भी अच्छे रहेंगे। एपीएमसी ढली के सचिव देवराज कश्यप ने बताया कि वीरवार को 40 से 50 रुपये प्रतिकिलो थोक भाव पर मटर बिका है। करसोग और ठियोग से करीब 107 क्विंटल मटर मंडी पहुंचा।
फूलगोभी 20 रुपये किलो तक बिकी
ढली मंडी में वीरवार को फूलगोभी 20 रुपये किलो के थोक भाव पर बिकी। ठियोग से फूलगोभी की खेप मंडी पहुंची। हल्की गोभी 12 से 15 रुपये भी बिकी। बढि़या किस्म की गोभी को 20 रुपये तक दाम मिले।
टमाटर के लिए संजीवनी बन बरसे बादल, किसानों में खुशी
जमीन में रोपाई के लिए आवश्यक नमी आने से टमाटर उत्पादकों के चेहरे खिल उठे हैं। क्षेत्र के अधिकांश किसान टमाटर की पनीरी तैयार कर चुके हैं। पनीरी के तैयार होने के बाद पर्याप्त नमी न होने के कारण असमंजस की स्थिति में थे। कुछ किसान पनीरी की रोपाई खेतों और क्यारियों में कर चुके थे तो कुछ बारिश का इंतजार कर रहे थे।
बीते दिनों हुई बारिश के बाद अब अधिकांश किसान रोपाई के कार्य में जुट गए हैं। जो किसान देर से फसल उगाते हैं, वह भी अब टमाटर की रोपाई के लिए खेत तैयार करने में जुट गए हैं। बारिश से जमीन में नमी होने से इसकी खोदाई काफी आसान हो गई है।
बता दें कि सेब के बाद टमाटर क्षेत्र की सबसे बड़ी नकदी फसल मानी जाती है। उपमंडल चौपाल और कुपवी के निचले इलाकों में हजारों बीघा जमीन में टमाटर की खेती की जाती है। भराणु खड्ड के किनारे मशराह से पिउन्त्रा दवड्डा तक, शालवी नदी के किनारे रेवल पुल से बधाल नेवल क्षेत्र, गुम्मा, कुपवी के काटली और तरह खड्ड के किनारे किसान के कई किस्मों के टमाटर की खेती करते हैं।