नोटबंदी का असर शिमला की थोक मंडियों में भी दिखने लगा है। पिछले महीने तक आसमान छू रहे दालों के भाव गिर गए हैं। हालांकि, परचून में दुकानदार अभी भी पुराने रेटों पर ही दालों को बेच रहे हैं। इस स्थिति में सीधा मुनाफा दुकानदारों की जेब में जा रहा है और उपभोक्ताओं की जेब को चूना लग रहा है।
दुकानदारों का कहना है कि उन्होंने पुराने रेट पर दालें खरीदी हैं। जब तक पुराना कोटा खत्म नहीं हो जाता उसी रेट पर दालें देंगे। नया स्टॉक लेने के बाद नए रेट लागू होंगे। मंगलवार को सब्जी मंडी में भी सब्जियों के दामों में गिरावट आई है। इसके पीछे मैदानी इलाकों से सब्जियों की ज्यादा आवक बताई जा रही है। नवंबर माह के शुरू में सब्जियों और दालों के दाम आसमान छू रहे थे।
'सब्जियों के दामों में गिरावट आने से गृहिणियों ने राहत की सांस ली है। दालों के रेट को लेकर गृहिणियों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह कम हो जाएंगे।' - पुरषोत्तम सिंह, जिला नियंत्रक, खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले
शादियों में जा रहा सामान की चैक से हो रही पेमेंट
सब्जी मंडी से शादियों के लिए बुकिंग पर जाने वाली सब्जियां की पेमेंट चेक के माध्यम से की जा रही है। सब्जी एवं फल विक्रेता संघ के प्रधान बिश्वेश्वर नाथ का कहना है कि सब्जियों के दामों में गिरावट आने की मुख्य वजह मैदानी इलाकों से सब्जियों की सप्लाई है। इससे दाम गिरे हैं।