उपायुक्त कार्यालय के बाहर कार्यकर्ताओं ने की नारेबाजी
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। सीटू जिला कमेटी शिमला ने अमेरिका की वेनेजुएला के खिलाफ की सैन्य आक्रामक कार्रवाई और बमबारी के विरोध में उपायुक्त कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में अमेरिका की इस कार्रवाई की निंदा की गई और नारेबाजी की गई।
इस दौरान सीटू के राज्य कोषाध्यक्ष जगतराम, डॉ. ओंकार साद, विवेक कश्यप, वीरेंद्र, जगमोहन, महेश, रमाकांत, निशा उमा, सुरेंद्र रामू सहित अन्य लोग उपस्थित रहे। नेताओं ने कहा कि 3 जनवरी को वेनेजुएला की राजधानी काराकस, मिलिट्री बेस, एयरबेस, रडार स्टेशन, बंदरगाह और मिरांडा हवाई अड्डे पर डेढ़ सौ से अधिक अमेरिकी विमानों से हमले और बमबारी की गई। इसका उद्देश्य वेनेजुएला के रणनीतिक संसाधनों, खासकर तेल और गैस खनिजों पर कब्जा करना और राजनीतिक स्वतंत्रता को बलपूर्वक खत्म करना है। यह अमेरिका की वेनेजुएला को अपना गुलाम बनाने की साजिश है।
वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मधुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार करके अमेरिका ले जाया गया है। वेनेजुएला के पास 303 अरब बैरल का विशाल तेल भंडार है, जो दुनिया में सबसे अधिक है। इसके अलावा खनिज जैसे एल्युमिनियम, सोना, लोहा, स्टील और तांबा भी अपार मात्रा में मौजूद हैं, जिस पर अमेरिका कब्जा करना चाहता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप विकासशील देशों पर कभी आर्थिक प्रतिबंध, बेतहाशा टैरिफ लगाकर या दो देशों के बीच टकराव पैदा करके युद्ध करवाने का प्रयास करते हैं, ताकि आर्थिक रूप से पिछड़े देश अमेरिका पर निर्भर रहें और उनकी गुलामी करें। इससे अमेरिका का घिनौना चेहरा दुनिया के सामने आ गया है। यह अंतरराष्ट्रीय शांति और स्थिरता के लिए बड़ा खतरा बन गया है।
नेताओं ने कहा कि अमेरिका ने भारत पर भी कभी आर्थिक प्रतिबंध लगाकर दबाव बनाने का प्रयास किया है, लेकिन भारत की मोदी सरकार ने वेनेजुएला पर हमलों के खिलाफ कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। वेनेजुएला पर इस हमले का असर भारत पर भी पड़ेगा तेल और अन्य सामान महंगा हो जाएगा, जिससे देश में महंगाई बढ़ेगी।
उन्होंने मांग की कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मधुरो और उनकी पत्नी को तुरंत रिहा किया जाए। वेनेजुएला में अनाधिकृत अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों को तुरंत बंद किया जाए और सेना को वापस ले लिया जाए।