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Shimla News: सात अजूबों, बदहाल सड़कों और नए कार्य न होने पर सदन में बरपा हंगामा

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भाजपा और कांग्रेस पार्षदों ने महापौर से पूछा, आखिर खस्ताहाल सड़कों से कब मिलेगी राहत
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बरसात से हुए नुकसान की तक नहीं हुई है भरपाई
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में बिना सदन की मंजूरी के सात अजूबे लगाने और खस्ताहाल सड़कों का मुद्दा शुक्रवार को नगर निगम सदन में गरमाया रहा। भाजपा के साथ कांग्रेस पार्षदों ने भी शहर की सड़कों की टारिंग न होने पर सवाल उठाए।
पार्षदों ने महापौर से पूछा कि आखिर नगर निगम लोगों को धूल-मिट्टी और गड्ढों से भरी सड़कों से कब राहत दिलाएगा। भाजपा पार्षद आशा शर्मा और कमलेश मेहता ने सवाल उठाया कि नगर निगम ने अभी तक सड़कों की टारिंग का काम क्यों शुरू नहीं किया है। वहीं कांग्रेस पार्षद विनीत शर्मा और विशाखा मोदी ने कहा कि आठ से दस महीने बीतने के बाद भी शांति विहार और मशोबरा की सड़कें खस्ताहाल हैं। लोग पार्षदों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। दुकानदार भी धूल-मिट्टी से परेशान हैं। इस पर महापौर सुरेंद्र चौहान ने संबंधित कंपनी के एजीएम से जवाब मांगा। एजीएम आदर्श भोटा ने बताया कि नई पेयजल लाइनें बिछाने के लिए खोदी गई सड़कों की टारिंग का काम शुरू कर दिया है। बालूगंज में टारिंग का काम पूरा हो चुका है, जबकि खलीनी में इसी सप्ताह काम पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद मशोबरा, शांति विहार और ढली वार्डों में सड़कों को दुरुस्त किया जाएगा।
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फाइलें अटकने पर पार्षदों ने उठाए सवाल
कई महीनों से विकास कार्यों की फाइलें अटकी होने पर टुटू की पार्षद मोनिका भारद्वाज ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पहले प्रस्ताव तैयार करने और अभियंताओं के निरीक्षण में ही महीनों लग जाते हैं। फाइल जब आयुक्त तक पहुंचती है तो बजट की कमी का हवाला देकर काम टाल दिए जाते हैं। उर्मिला कश्यप, निशा ठाकुर समेत अन्य पार्षदों ने भी विकास कार्य नहीं होने पर नाराजगी जताई। महापौर सुरेंद्र चौहान ने कहा कि बजट की उपलब्धता के आधार पर विकास कार्य करवाए जा रहे हैं। किस वार्ड में कितने काम हुए हैं, इसकी सूची पार्षदों को उपलब्ध करवाई जाएगी।
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अजूबों के लिए बेच दिया लोहे
का कबाड़, 45 लाख किए खर्च
शिमला। सदन में भाजपा पार्षद सरोज ठाकुर ने शहर में सात अजूबे स्थापित करने की योजना पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि सदन की मंजूरी के बिना ही वाहनों का कबाड़ कैसे बेच दिया गया। आरोप लगाया कि लोहे के साथ तांबा भी बेच दिया गया। अब यह अजूबे मालरोड पर पड़े सड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि योजना पर सदन की मंजूरी के बिना ही 45 लाख रुपये खर्च कर दिए गए। इस राशि से शहर में कई सड़कें और रास्ते बनाए जा सकते थे। पार्षद ने पूरे मामले की जांच करवाने की मांग उठाई। इस पर महापौर सुरेंद्र चौहान ने कहा कि मालरोड के सौंदर्यीकरण के उद्देश्य से सात अजूबे तैयार करवाए हैं। हेरिटेज कमेटी से मंजूरी नहीं मिलने के कारण अब इन्हें अन्य स्थानों पर स्थापित किया जाएगा। उन्होंने योजना में किसी तरह की गड़बड़ी होने से इनकार करते हुए कहा कि नगर निगम का उद्देश्य शहर के सौंदर्यीकरण को बढ़ावा देना है।
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