हिमाचल में उपप्रधान का पद महिलाओं के लिए आरक्षित नहीं होगा। पिछले चुनाव की तरह इस पद के लिए इस बार भी चुनाव ओपन होंगे। लंबी मंत्रणा के बाद सरकार ने यह निर्णय लिया है। कांग्रेस ने सत्ता में आते ही यह विचार किया था कि पंचायत चुनाव में उप प्रधान पद पर महिलाओं के लिए पचास फीसदी आरक्षण रखा जाए।
लेकिन यह विचार सिरे नहीं चढ़ सका। यह मालूम रहे कि पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव इसी साल हैं। ये 3243 ग्राम पंचायतों में होने जा रहे हैं। इन पंचायतों में उप प्रधान पद की लड़ाई ओपन होगी। यानी सभी श्रेणियों के लोग चुनाव में भाग ने सकेंगे।
पांच साल पहले हुए पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में ग्राम पंचायतों में उप प्रधानों का पद ओपन रखा गया था। जिला परिषद सदस्यों, पंचायत समिति सदस्यों, पंचायत प्रधानों और वार्ड सदस्यों के चुनाव में ही रोस्टर लागू किया गया था। केवल उप प्रधान पद को ही अनारक्षित रखा गया था।
इस बार भी राज्य सरकार ने यही निर्णय लिया है कि आगामी पंचायत चुनाव में उप प्रधान पद के चुनाव पिछले चुनाव की तर्ज पर ही होंगे। हालांकि, जिला परिषद सदस्यों, पंचायत समिति सदस्यों, पंचायत प्रधानों और वार्ड सदस्यों के लिए रोस्टर में बदलाव होना है। इस पर भी जल्दी फैसला हो सकता है।
पंचायती राज मंत्री अनिल शर्मा ने बताया कि ग्राम पंचायतों में इस बार उप प्रधान पद के चुनाव के लिए उम्मीदवारी अनारक्षित रहेगी। उन्होंने कहा कि सरकारी स्तर पर मंत्रणा के बाद यह फैसला ले लिया गया है।
विकास खंडों के पुनर्गठन को मांगे प्रस्ताव
हिमाचल प्रदेश पंचायती राज विभाग ने विकास खंडों के नए सिरे से पुनर्गठन के लिए प्रस्ताव मांगे हैं। ये प्रस्ताव विधायकों के इस अनुरोध पर मांगे हैं कि उनके निर्वाचन क्षेत्रों और विकास खंडों में समरूपता नहीं है। ऐसा पुनर्सीमांकन के बाद हुआ है कि कई स्थानों में एक विधानसभा क्षेत्र दो या तीन विकास खंडों में विभाजित हो गया है। जैसे ही प्रस्ताव मिल जाते हैं, इस पर फैसला हो जाएगा।