बेरोकटोक हिमाचल पहुंच रहे गैर प्रमाणित पौधों से सेब बागवानी को खतरे में डाला जा रहा है। कश्मीर सहित अन्य राज्यों से खुलेआम सेब के पौधे हिमाचल पहुंच रहे हैं। इतना ही नहीं, प्रदेश की अप्रमाणित नर्सरियों के पौधे भी बेरोकटोक सड़कों पर बिक रहे हैं। गैर प्रमाणित पौधों में क्वारंटीन नियमों का पालन न होने से संक्रमित पौधों के कारण सेब के बागीचों में वायरस फैलने का खतरा है।
बागीचों में नए पौधे लगाने की होड़ हिमाचल में सेब बागवानी के लिए संकट खड़ा कर सकती है। अप्रमाणित नर्सरियों के रोग ग्रस्त पौधों से पूरे बगीचे तबाह होने का खतरा है। शिमला, कुल्लू और मंडी जिले में उद्यान विभाग से लाइसेंस लिए बिना ही नर्सरियां लगा दी गई हैं और पौधे बेचे जा रहे हैं। सर्दी के मौसम में बागवान नए बगीचे लगा रहे हैं। सेब की नई किस्मों के पौधे लगाने की अंधी दौड़ मची है। अप्रमाणित नर्सरियों के पौधों को नई वैरायटी का नाम देकर बेचा जा रहा है।
सोशल मीडिया पर नई वेरायटी का प्रचार हो रहा है। पौधों के एवज में मनमानी कीमत वसूल कर पक्के बिल भी नहीं दिए जा रहे। सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत के बाद उद्यान विभाग बीते साल विदेशों से पौधे आयात करने वाली तीन नर्सरियों के प्रमाण पत्र रद्द कर चुका है। संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान का कहना है कि पौधों के आयात में प्री एंट्री क्वारंटाइन और पोस्ट क्वारंटाइन सिस्टम का पालन जरूरी है।
कश्मीर से गैर कानूनी तरीके से बिना जांच आ रहे पौधे और पाल्टियां में बिक रहे हैं। स्कैब, अल्ट्रनेरिया, मारसिनोना जैसी घातक फंगस बागान में पहुंच गई है। स्कैब 35 साल बाद इस रूट से वापस हिमाचल पहुंची है। बागवानों को जागरूक होने की जरूरत है और सरकार को भी सख्ती बरतनी चाहिए।
उद्यान विभाग के अधिकारियों को गैर पंजीकृत नर्सरियों के पौधे बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने और अवैध तौर पर बाहरी राज्यों से आ रहे पौधों को पकड़ने के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में वाहनों के निरीक्षण के निर्देश दिए हैं। विभाग की ओर से बागवानों को उच्च गुणवत्ता के पौधे सस्ती दरों पर उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। बागवान सरकार की प्रमाणित नर्सरी से ही पक्का बिल लेकर पौधे खरीदें।
- जगत सिंह नेगी, बागवानी मंत्री