हिमाचल में पड़ोसी राज्यों से महंगा सीमेंट बिकने के बाद उपजा विवाद सुलझाने के लिए उद्योग निदेशक की अध्यक्षता में कमेटी की जांच के बाद भी नतीजा शून्य ही रहा। प्रदेश में नई सरकार के सत्ता में आते ही सीमेंट कंपनियों पर नकेल कसी गई तो कंपनियों ने सारा ठीकरा ट्रक ऑपरेटरों के पर फोड़ दिया।
कंपनी प्रबंधन और ट्रक ऑपरेटरों के बीच सीमेंट ढुलाई के रेट पर तनातनी बनी हुई है। प्रदेश में चार बड़ी सीमेंट कंपनियां अंबुजा, एसीसी, सीसीआई और अल्ट्राटेक हर साल 12.05 मिलियन टन सीमेंट का उत्पादन कर रही हैं। बावजूद इसके पड़ोेसी राज्यों की अपेक्षा हिमाचल में सीमेंट महंगा बिकता है। इस पर लंबे समय से विवाद चल रहा है।
पूर्व सरकार ने भी कमेटी गठित की थी। इसमें खनन विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, बिजली विभाग के अधिकारियों को शामिल किया गया था। कमेटी ने सीमेंट प्लाटों का दौरा करने के बाद पाया था कि सीमेंट के हिमाचल में महंगा होने के क्या कारण हैं। फरवरी 2022 में कमेटी ने सरकार को रिपोर्ट सौंपी थी।
इसमें यह बात सामने आई कि कंपनियां अपने स्तर पर सीमेंट के दाम तय करती हैं। सीमेंट पर सरकार का नियंत्रण न होने से कंपनियां बेलगाम रही हैं। रेट सीमेंट की मांग और आपूर्ति के हिसाब से तय किए जाते हैं। केंद्र और राज्य सरकार ने सीमेंट को 15 फरवरी, 2002 से जरूरी वस्तु की सूची से बाहर किया है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया था कि कंपनियां कच्चा माल महंगा और परिवहन भाड़ा ज्यादा होने के कारण सीमेंट महंगा होने की दलील देती रही हैं। सीमेंट का पहाड़ों में ट्रक भाड़ा 10.58 रुपये प्रति किमी प्रति टन और मैदानों में 5.29 रुपये प्रति किमी प्रति टन तय है।
प्रदेश में रेल से सीमेंट ढुलाई की व्यवस्था नहीं है। 31 मार्च, 2022 से 31 मार्च, 2022 तक सीमेंट के फैक्ट्री रेट के दाम हिमाचल सिविल सप्लाई ने 237.75 प्रति 50 किलो बैक तय किया है। कमेटी ने भी रिपोर्ट सरकार को सौंपकर इतिश्री कर ली थी।