यहां पानी में औसतन 55 से 65 माइक्रोप्लास्टिक कण प्रति लीटर और तलछट में 89 से 103 कण प्रति किलोग्राम मिले। शोधकर्ताओं ने इसे इस बात का संकेत माना है कि माइक्रोप्लास्टिक अपेक्षाकृत दूरस्थ हिमालयी क्षेत्रों तक भी पहुंच रहा है। जीरो प्वाइंट पर जहां नदी के किनारे कृषि क्षेत्र हैं और कई छोटी सहायक धाराएं मिलती हैं, पानी में माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा 84 से 116 कण प्रति लीटर और तलछट में 143 से 179 कण प्रति किलोग्राम मिली। अध्ययन में कृषि गतिविधियों, घरेलू गतिविधियों और प्लास्टिक कचरे को संभावित स्रोतों में शामिल किया गया है।
सीयू कांगड़ा के अभिषेक कुमार और रेशमा सिन्हा, एमिटी विवि हरियाणा के असीम ग्रोवर और लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी पंजाब की दिव्या ज्योति ने यह अध्ययन किया है। शोधपत्र 23 सितंबर 2026 को डिस्कवर एनवायरनमेंट में प्रकाशित हुआ है।