भाजपा अब कांग्रेस में सुक्खू-वीरभद्र सिंह के बीच की अंतर्कलह को भुनाने में जुट गई है। भाजपा कोर कमेटी की हुई बैठक में कांग्रेस में पड़ी फूट पर भी मंथन हुआ। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों के साथ कमजोर लीडरशिप का मुद्दा भी उठाया जाएगा।
कांग्रेस में पनपे मतभेद से भाजपा रणनीतिक फायदा लेना चाहती है। प्रदेश नेतृत्व को कांग्रेस विवाद को लगातार तूल देने पर भी निर्णय हुआ।
भाजपा के चुनाव प्रचार अभियान का अगला चरण राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की कांगड़ा हुंकार रैली से होगा। इस चरण में कांग्रेस के खिलाफ तीखे हमले होंगे।
भ्रष्टाचार पर घेरने की तैयारी
वीरभद्र सिंह को भ्रष्टाचार पर घेरने के साथ कांग्रेस पार्टी भी निशाने पर आएगी। प्रदेश कांग्रेस में चल रही खींचतान को सियासी मुद्दा बनाया जाएगा। कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान पर प्रदेश के नेता हमला करेंगे, जबकि केंद्र से आने वाले नेताओं का मोदी सरकार की उपलब्धियों पर फोकस रहेगा।
पंचकूला में हुई कोर कमेटी की बैठक में प्रचार अभियान का पूरा खाका तैयार किया गया है। कांगड़ा, मंडी और शिमला जिलों पर सर्वाधिक फोकस रहेगा।
बताया जा रहा है कि इन तीनों जिलों में केंद्रीय मंत्रियों के सर्वाधिक दौरे होने जा रहे हैं। केंद्रीय नेताओं के प्रचार कार्यक्रमों के अलावा प्रदेश लीडर भी जनसभाएं करेंगे, जिसमें वीरभद्र सरकार ही निशाने पर रहेगी।
टिकट पर संशय बरकरार
भाजपा में टिकट के दावेदारों में संशय बना हुआ है। प्रदेश नेतृत्व को भरोसे में लेकर केंद्रीय नेतृत्व टिकट तय करेगा, लेकिन विधानसभा क्षेत्रों का आंतरिक सर्वेक्षण ही प्रत्याशी चयन का सबसे बड़ा आधार होगा। प्रदेश चुनाव प्रभारी थावर चंद गहलोत ने केंद्र के तय मानकों से कोर कमेटी को अवगत करवाया।
टिकटों के लिए खेमेबाजी से बचने की सलाह दी है। प्रदेश नेतृत्व के स्तर से भी हर विधानसभा की रिपोर्ट भेजी जानी है, जिसमें संभावित दावेदारों के नाम होंगे। यह भी स्पष्ट किया जा चुका है कि एक सीट से दावेदारों का पैनल आएगा। सीटिंग विधायक की सीटों पर भी पैनल से प्रदेश के कई नेता सहमत नहीं बताए जा रहे।