मजदूर संगठनों ने केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज कर दिया है। सीटू सहित देश की 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और विभिन्न फेडरेशनों के आह्वान पर देशभर के लाखों कर्मचारी नवंबर महीने में तीन दिन तक संसद भवन दिल्ली के बाहर घेरा डालकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।
संसद घेराव के माध्यम से मजदूरों का न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये निर्धारित करने की मांग के समर्थन में सीटू की हिमाचल इकाई भी तैयारी में है। रविवार को सीटू कार्यालय शिमला में राज्य कमेटी ने आंदोलन की रूपरेखा पर चर्चा की। बैठक में सीटू राज्य सचिव प्रेम गौतम ने बताया कि मजदूरों का न्यूनतम वेतन 18000 रुपये करने तथा केंद्र की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ और श्रम
कानूनों में परिवर्तन के खिलाफ 9 से 11 नवंबर तक संसद का घेराव किया जाएगा। प्रदेश से हजारों मजदूर दिल्ली कूच करेंगे। अक्तूबर के पहले पखवाड़े में केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और फेडरेशनों की ओर से राज्य स्तरीय अधिवेशन किए जाएंगे। यह भी निर्णय लिया कि रूसी क्रांति के सौ वर्ष पूरा होने पर 7 नवंबर को प्रदेश में सेमीनार लगाए जाएंगे।
केंद्र से मजदूरों का न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये करने की मांग
कहा कि मजदूर विरोधी केंद्र सरकार 44 श्रम कानूनों को खत्म कर रही है। इसकी एवज में केवल 5 कोड ला रही है। यह पूरी तरह मजदूर विरोधी हैं। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी, मिड-डे मील, आशा जैसे स्कीम वर्करों को पक्का किया जाए। समान कार्य का समान वेतन दिया जाए।
सभी मजदूरों को स्वास्थ्य बीमा योजना और स्वास्थ्य कवर के तहत लाया जाए। आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए नीति बनाई जाए। सभी निर्माण मजदूरों और मनरेगा वर्कर्स का पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने चेताया कि अगर मजदूरों को न्याय न दिया गया तो आंदोलन तेज होगा।
बैठक में डॉ. कश्मीर ठाकुर, प्रेम गौतम, जगतराम, विजेंद्र मेहरा, रमाकांत मिश्रा, रविंद्र कुमार, जोगिंद्र कुमार, राजेश, भूप सिंह, एनडी रणोत, ओम दत्त, बिहारी सेवगी, कुलदीप डोगरा, खिमी भंडारी, राजकुमारी, सुमित्रा, केवल कुमार, किशोरी ढटवालिया आदि मौजूद रहे।