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Cement Dispute: दाड़लाघाट में ट्रक ऑपरेटरों ने निकाली रोष रैली, हमीरपुर में सीएम से मिलने का नहीं मिला समय

Wed, 25 Jan 2023 08:46 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर/दाड़लाघाट (सोलन)

सार

बुधवार को ट्रक ऑपरेटर अंबुजा के मुख्य द्वार दाड़लाघाट में एकत्रित हुए और अदाणी समूह के विरुद्ध रोष प्रकट किया।  रैली के रूप में अदाणी समूह के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अंबुजा गेट से दाड़लाघाट बस स्टैंड से होते हुए वापस अंबुजा चौक पर पहुंचे।
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दाड़लाघाट में ट्रक ऑपरेटरों ने निकाली रोष रैली। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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 हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के दाड़लाघाट में सीमेंट प्रबंधन और ट्रक ऑपरेटरों के बीच माल ढुलाई भाड़े को लेकर विवाद 43वें दिन में प्रवेश कर गया है। बुधवार को ट्रक ऑपरेटर अंबुजा के मुख्य द्वार दाड़लाघाट में एकत्रित हुए और अदाणी समूह के विरुद्ध रोष प्रकट किया। रैली के रूप में अदाणी समूह के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अंबुजा गेट से दाड़लाघाट बस स्टैंड से होते हुए वापस अंबुजा चौक पर पहुंचे। एडीकेएम के पूर्व प्रधान बालक राम शर्मा, राकेश गौतम और बंटू शुक्ला ने कहा कि विवाद थम नहीं रहा है, मगर अभी तक अदाणी समूह और सरकार की ओर से सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आए हैं। ऑपरेटरों ने निर्णय लिया कि 26 जनवरी को अंबुजा चौक में ऑपरेटर ध्वजारोहण करेंगे। उम्मीद है सरकार ऑपरेटरों के पक्ष में निर्णय लेगी। संवाद

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वहीं, बिलासपुर जिला ट्रक परिवहन सहकारी सभा (बीडीटीएस) के पदाधिकारी बुधवार को मुख्यमंत्री से नहीं मिल पाए। बीडीटीएस के पदाधिकारियों ने हमीरपुर में मुख्यमंत्री से मिलने का समय मांगा था, लेकिन उन्हें समय नहीं मिल पाया। अब बीडीटीएस के पदाधिकारियों की शुक्रवार को मुख्यमंत्री से मिलने की योजना है।  बीडीटीएस के पदाधिकारियों ने घुमारवीं के विधायक राजेश धर्माणी के माध्यम से मुख्यमंत्री से मिलने का समय मांगा था, बुधवार को मुख्यमंत्री के व्यस्त कार्यक्रम होने के चलते समय नहीं मिल पाया। अब ट्रक ऑपरेटर को उम्मीद है कि 26 जनवरी के बाद मुख्यमंत्री मिलने का समय देंगे। उधर, बीडीटीएस पदाधिकारी और ट्रक ऑपरेटर बरमाणा में एकत्रित हुए। बीडीटीएस भवन के सभागार में अभी तक के आंदोलन और सरकार के रवैये पर चर्चा की गई। ट्रक ऑपरेटरों ने एक स्वर में प्लांट को जल्द से जल्द शुरू करवाने की मांग की। बीडीटीएस प्रधान राकेश ठाकुर ने कहा कि ट्रक ऑपरेटर सरकार की अधिसूचना का इंतजार कर रहे हैं। ट्रक ऑपरेटर का सब्र टूटने लगा है। मुख्यमंत्री से वार्ता कर ट्रक ऑपरेटरों के हित में अधिसूचना जारी करने की मांग की जाएगी। 42 दिन से सीमेंट प्लांट बंद होने से ट्रक ऑपरेटर और प्लांट से रोजी रोटी कमा रहे लोगों की आर्थिक हालत खराब हो चुकी है। 

सीमेंट विवाद सुलझाने के लिए विधायक कटवाल ने मुख्यमंत्री सुक्खू को लिखा पत्र
 झंडूता के विधायक जीतराम कटवाल ने सीमेंट विवाद जल्द सुलझाने के लिए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान को पत्र लिखा है। इसमें लिखा है कि हजारों लोगों के रोजगार से जुड़े मुद्दे का हल जल्द नहीं निकाला गया तो भाजपा जनता के साथ मिलकर सड़कों पर आंदोलन करेगी। बजट सत्र में यह मुद्दा जोर-शोर से उठाया जाएगा।  बिलासपुर में प्रेसवार्ता में कटवाल ने कहा कि दो सीमेंट प्लांट पर तालाबंदी को 42 दिन हो गए हैं। ये प्लांट बिलासपुर और सोलन जिले की आर्थिकी के लिए जरूरी हैं। विवाद का हल निकालना सरकार का विषय है। इतने दिन बाद भी सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की है। सीमेंट प्लांट से बिलासपुर के 3,635 ट्रक ऑपरेटरों और करीब 25,000 लोगों का रोजगार जुड़ा है। सरकार इस मुद्दे पर मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकती है। मुख्यमंत्री और उद्योग मंत्री को मामला जल्द सुलझाना चाहिए। साल 2005 के फार्मूले के तहत कार्रवाई की जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मामले को लेकर चिंतित नहीं है और कोई रुचि नहीं दिखा रही है। भाजपा ट्रक ऑपरेटर के हितों के लिए साथ खड़ी है। 

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सांसद सुरेश कश्यप होंगे ट्रक ऑपरेटरों के धरने में शामिल

अर्की के पूर्व विधायक गोविंद राम शर्मा ने कहा कि शिमला के सांसद सुरेश कश्यप 27 जनवरी को मंडल भाजपा अर्की के साथ ट्रक ऑपरेटरों के पक्ष में दाड़लाघाट में धरना-प्रदर्शन में मौजूद रहेंगे। दाड़लाघाट में पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि भाजपा ट्रक ऑपरेटरों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। उन्होंने सीमेंट विवाद हल न करने पर सरकार पर निशाना साधा। कहा कि प्रदेश में अंबुजा व एसीसी प्लांट पर ताले लगे काफी समय हो गया है, लेकिन अभी इस मसले का हल नहीं निकला है। इससे हजारों लोगों का व्यवसाय खत्म हो गया है। ट्रक ऑपरेटरों के लिए किस्त देना मुश्किल हो गया है। टायर पंचर की दुकान से लेकर ढाबे और अन्य कारोबार करने वाले लोगों को जीवनयापन करना मुश्किल हो चुका है। सरकार बने हुए एक माह का समय हो गया है, लेकिन सरकार इस मसले को हल करवाने में विफल रही है। सरकार जल्द मामले की गंभीरता से समझे और सीमेंट कंपनियों के साथ बातचीत कर लोगों के रोजगार संकट को खत्म करें।

 
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