प्रदेश प्रशासनिक ट्रिब्यूनल के मंडी सर्किट की डीके शर्मा पर आधारित एकल पीठ ने तीन अहम फैसलों में शिक्षकों को बड़ी राहत दी है। केंद्रीय मुख्य शिक्षक रामलाल वर्ष 2000 में रिटायर हो गए थे। वे बालीचौकी शिक्षा खंड से हैं। उन्होंने वकील टेक चंद शर्मा के माध्यम से प्रशासनिक ट्रिब्यूनल में अपील दायर की थी कि उनके सेवाकाल में अप्रशिक्षित अवधि का जो पीरियड है, उसे नहीं जोड़ा गया है।
इस कारण वह खंड शिक्षा अधिकारी के पद पर पदोन्नत होने से वंचित हो गए। ट्रिब्यूनल ने उनकी अपील को जायज माना और आदेश दिए कि रामलाल की अप्रशिक्षित अवधि जो 1963 से 1969 तक है, को भी सेवाकाल में शामिल किया जाए। उन्हें बीपीईओ यानी खंड शिक्षा अधिकारी पद से सेवानिवृत्त माना जाए। उसी हिसाब से सभी तरह के लाभ दिए जाएं।
इसी तरह के एक अन्य मामले में केंद्रीय मुख्य शिक्षक यानी सीएचटी पुष्पा देवी ने ट्रिब्यूनल में अपने वकील टेक चंद शर्मा के माध्यम से याचिका दायर की थी। इसमें ट्रिब्यूनल ने निर्णय दिया कि पुष्पा देवी जो सुंदरनगर शिक्षा खंड से हैं, को वरिष्ठता सूची में रखा जाए। उन्हें सारे लाभ दिए जाएं।
पुष्पा देवी भी अपने पद से रिटायर हो चुकी हैं। एक अन्य मामले में थुनाग क्षेत्र के उत्तम सिंह को जेबीटी से टीजीटी में आने के लिए वरिष्ठता सूची में नहीं लिया गया था। इस पर उन्होंने प्रशासनिक ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाया। एडवोकेट टेक चंद शर्मा के माध्यम से अपील की।
उनका कहना था कि जेबीटी को टीजीटी पर पदोन्नति के लिए जो 25 प्रतिशत कोटा था, उन्हें उसका जो लाभ मिलना था, वह नहीं दिया गया। ऐसे में उन्हें लाभ दिया जाए। ट्रिब्यूनल ने अपील को सही मानते हुए सरकार और शिक्षा विभाग को आदेश दिए कि उत्तम सिंह की जो वरिष्ठता बनती है, उसका लाभ देकर उसी दिन से टीजीटी में पदोन्नति दी जाए।