पहाड़ी क्षेत्र में वैज्ञानिक और सुरक्षित निर्माण के लिए तकनीकी संस्थानों से होगा सत्यापन
भू-तकनीकी जांच, स्ट्रक्चरल डिजाइन, पर्यावरण मंजूरी और वन विभाग की अनुमति के बाद ही शुरू होगा काम
1,500 करोड़ से अधिक की परियोजना में सुरक्षा मानकों से समझौता नहीं, एक भी पेड़ बिना अनुमति नहीं कटेगा
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी शिमला के निकट प्रस्तावित जाठिया देवी माउंटेन टाउनशिप का निर्माण केवल कागजी मंजूरी के आधार पर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर के तकनीकी संस्थानों की वैज्ञानिक जांच के बाद ही शुरू होगा। प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में निर्णय लिया है कि परियोजना की भू-तकनीकी जांच और स्ट्रक्चरल डिजाइन का सत्यापन भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) या राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से कराया जाएगा। इसका उद्देश्य पहाड़ी क्षेत्र में सुरक्षित, टिकाऊ और वैज्ञानिक निर्माण सुनिश्चित करना है।
कैबिनेट ने टाउनशिप की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की अनुमति देते हुए स्पष्ट किया है कि निर्माण कार्य शुरू करने से पहले सभी तकनीकी और पर्यावरणीय मानकों का पालन अनिवार्य होगा। सरकार का मानना है कि हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं, भूस्खलन और अनियोजित निर्माण से उत्पन्न जोखिम को देखते हुए किसी भी बड़े निर्माण कार्य में वैज्ञानिक मूल्यांकन आवश्यक है। परियोजना के लिए नगर एवं ग्राम योजना (टीसीपी) नियम, 2014 के कुछ प्रावधानों में छूट दी गई है, ताकि पहाड़ी भू-भाग के अनुरूप व्यवहारिक योजना तैयार की जा सके। हालांकि इस छूट का अर्थ सुरक्षा मानकों में ढील नहीं होगा। भवन निर्माण शुरू होने से पहले तकनीकी संस्थानों की रिपोर्ट के आधार पर ही अंतिम डिजाइन को स्वीकृति मिलेगी। कैबिनेट ने परियोजना के लिए स्पष्ट पर्यावरणीय शर्तें भी तय की हैं। निर्माण शुरू करने से पहले पर्यावरण मंजूरी और संबंधित विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
इसके अलावा वन विभाग की पूर्व अनुमति के बिना परियोजना क्षेत्र में एक भी पेड़ नहीं काटा जाएगा। सरकार ने परियोजना को पर्यावरण संरक्षण और विकास के संतुलन के साथ आगे बढ़ाने पर जोर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालयी राज्यों में निर्माण से पहले विस्तृत भू-तकनीकी अध्ययन, ढलानों की स्थिरता का आकलन और वैज्ञानिक डिजाइन भविष्य में भूस्खलन, भूमि धंसने और संरचनात्मक जोखिम जैसी समस्याओं को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी दृष्टिकोण को अपनाते हुए राज्य सरकार ने इस परियोजना में राष्ट्रीय तकनीकी संस्थानों की भागीदारी को अनिवार्य बनाया है।
-
शिमला के दबाव को कम करने के लिए विकसित होगी सैटेलाइट सिटी
जाठिया देवी माउंटेन टाउनशिप शिमला से करीब 14 किलोमीटर दूर विकसित की जाएगी। हिमुडा इसके लिए पहले ही लगभग 600 बीघा भूमि अधिग्रहीत कर चुकी है। सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल पर बनने वाली इस परियोजना की अनुमानित लागत 1,500 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। टाउनशिप में 21 बंगले, 73 विला, आठ मंजिला 31 आवासीय अपार्टमेंट ब्लॉक, 11 मंजिला पांच अपार्टमेंट ब्लॉक, छह व्यावसायिक ब्लॉक और दो मिक्स-यूज ब्लॉक विकसित किए जाएंगे। इसके अलावा प्राथमिक विद्यालय, कमर्शियल हॉल और अन्य नागरिक सुविधाएं भी प्रस्तावित हैं।
-
टाउनशिप को लेकर जनसुनवाई में आपत्ति दर्ज करवा चुके हैं स्थानीय लोग
जाठिया देवी माउंटेन टाउनशिप को लेकर स्थानीय ग्रामीण जिला प्रशासन की ओर से आयोजित जन सुनवाई में एसडीएम के समक्ष आपत्तियां दर्ज करवा चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना के लिए जिस स्थान का चयन किया गया है, वह लंबे समय से खेती, बागवानी और पशुपालन के काम आ रही है। इस भूमि पर यदि निर्माण होता है तो सैकड़ों परिवारों की आजीविका खत्म हो जाएगी। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि परियोजना के लिए उनसे सहमति भी नहीं ली गई है।