बाथू की लड़ी देखने पहुंचे सैलानी।
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पौंग झील में पांडवों की ओर से अज्ञातवास के दौरान निर्मित बाथू की लड़ी जैसे-जैसे पानी से बाहर आ रही है, वैसे-वैसे सैलानियों की भीड़ यहां लगना शुरू हो गई है। बाथू की लड़ी मंदिर ऊंचे टापू पर होने के कारण आधा बाहर आ गया है। जबकि चारों तरफ गहरा पानी है। पर्यटक कश्ती के माध्यम से इस मंदिर में पहुंच रहे हैं। यह मंदिर पौंग झील का जलस्तर बढ़ने के साथ ही पानी में समा जाता है और जब जलस्तर कम होता है, तो छह माह के बाद पानी से बाहर आ जाता है।
सदियों से पानी के अंदर रहने के बाद भी इस मंदिर को कोई फर्क नहीं पड़ा है। हालांकि लापरवाही के कारण यहां हमेशा हादसे का अंदेशा बना रहता है। इस मंदिर को निहारने वाले पर्यटक पानी की गहराई का अंदाजा न होने के कारण नहाने के लिए उतर जाते हैं। पिछले तीन-चार सालों से यहां पर आधा दर्जन लोगों की डूबने से मौत हो चुकी है।
लोगों की सुरक्षा के चलते प्रशासन की ओर से चेतावनी बोर्ड लगाया गया है। इसमें साफ शब्दों में लिखा है कि आगे गहरा पानी है। इसमें नहाने के लिए न उतरें। इसके बाद भी लोग झील के पानी में उतर जाते हैं। उपायुक्त डॉ. निपुण जिंदल ने कहा कि वहां पर पुलिस की गश्त को बढ़ाया जाएगा। किसी को भी झील में नहाने न दिया जाए। वन्य प्राणी विभाग को भी सुरक्षा के इंतजाम करने के निर्देश दिए जाएंगे।