टैक्सी चालकों सहित अन्य कारोबारियों को घर चलाना हुआ मुश्किल
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। पहाड़ों की रानी शिमला में पिछले दो सप्ताह में पर्यटन कारोबार में 50 फीसदी गिरावट आई है। इस वीकेंड पर शहर के होटलों में 15 से 20 फीसदी कमरे ही बुक रहे। कारोबार में आई गिरावट से पर्यटन व्यवसाय से जुड़े कारोबारियों की परेशानियां बढ़ गई हैं।
फरवरी की शुरुआत में बर्फबारी होने के बाद पर्यटन कारोबार में थोड़ा उछाल आया था। बर्फबारी देखने के लिए हजारों की संख्या में सैलानी शिमला का रुख कर रहे थे। आंदोलन शुरू होने से पहले भी होटलों में वीकेंड पर 50 से 60 फीसदी कमरे बुक रहते थे। अब किसान आंदोलन का प्रभाव शिमला सहित अन्य जिलों के पर्यटन कारोबार पर पड़ा है। कारोबारियों का कहना है कि आंदोलन की वजह से सैलानियों ने हिमाचल का रुख करना बंद कर दिया है। वीकेंड की छुट्टी मनाने के लिए शिमला में ज्यादातर सैलानी दिन में ही घूमने आए और शाम को लौट गए। ऐसे में होटलों के कमरे खाली रह जाते हैं। टैक्सी चालकों सहित अन्य कारोबारियों को अपनी किस्त देना और घर चलाना मुश्किल हो रहा है। बीते वर्ष आपदा के दौरान पर्यटन उद्योग के जख्म अभी तक भी नहीं भरे हैं। इस दौरान कारोबार पूरी तरह ठप हो गया था। इसके बाद थोड़ा कारोबार पटरी पर आना शुरू हो गया था, लेकिन इस वर्ष दोबारा बर्फ देरी से पड़ने और अब किसान आंदोलन की मार से कारोबार घट गया है।
राजधानी में इन दिनों विदेशी सैलानियों के सहारे ही कारोबार चल रहा है। बाहरी देशों से आने वाले सैलानी कुफरी, फागू, खड़ापत्थर, नारकंडा और हाटू पीक सहित अन्य पर्यटन स्थलों पर पहुंच रहे हैं।
इस वीकेंड पर भी कारोबार ठप
शिमला होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष प्रिंस कुकरेजा ने बताया कि मौसम में बदलाव आने के बाद थोड़ा कारोबार बढ़ा था, लेकिन पिछले दो हफ्ते में किसान आंदोलन के चलते कारोबार में 50 फीसदी की गिरावट आई है। अगर यही स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में कारोबार बहुत घाटे में चला जाएगा।
प्रिंस कुकरेजा, उपाध्यक्ष, होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन शिमला