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Manali Winter Queen: विंटर क्वीन बनने के लिए रोज पैदल चली निशा ठाकुर, जंक फूड छोड़ा

Mon, 08 Jan 2024 12:32 PM IST
Krishan Singh संजय भारद्वाज, मनाली (कुल्लू)

सार

तीन साल पहले विंटर क्वीन प्रतियोगिता का खिताब नहीं जीतने पर भी उसने हार नहीं मानी। तीन साल खूब मेहनत की। सुबह रोज करीब एक घंटे योग और पैदल चली।
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विंटर क्वीन निशा ठाकुर - फोटो : संवाद
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विस्तार
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 क्या हार में क्या जीत में, किंचित नहीं भयभीत मैं, संघर्ष पथ पर जो मिले यह भी सही वह भी सही। वरदान मांगूंगा नहीं, हो कुछ पर हार नहीं मानूंगा....। जी हां शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ की यह कविता विंटर क्वीन 2024 बनी प्रीणी गांव की निशा ठाकुर पर स्टीक बैठती है।  तीन साल पहले विंटर क्वीन प्रतियोगिता का खिताब नहीं जीतने पर भी उसने हार नहीं मानी। तीन साल खूब मेहनत की। सुबह रोज करीब एक घंटे योग और पैदल चली। जंक फूड से तौबा की और पौष्टिक भोजन लिया।  इसकी बदौलत वह आज विंटर क्वीन का ताज पहनने में कामयाब हो गई। निशा ठाकुर मॉडलिंग की दुनिया में मुकाम पाना चाहती है। वह कहती है कि विंटर क्वीन का ताज उनका सपना था। इसके लिए खूब मेहनत की। अब वह मिस हिमाचल, मिस इंडिया, एयर मिस यूनिवर्स तक पहुंचने को मेहनत करेंगी।

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स्थानीय लड़कियों को इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने का कार्य वह करती रहेगी।  निशा ठाकुर ने कहा कि वह गांव से है, लोग अपने बच्चों को इस क्षेत्र में नहीं भेजते। उन्होंने कहा कि बेटियां किसी से कम नहीं हैं। माता-पिता को बेटी को उसकी पसंद के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना चाहिए।  पिता रेवत राम और माता कमला देवी के घर जन्मी निशा का कहना है कि यह प्रतियोगिता बहुत ही मुश्किल थी। उन्हें उनका आत्मविश्वास जीत तक लेकर गया। निशा ने कैंब्रिज और ट्रिनिटी स्कूल में पढ़ाई की। 12वीं के बाद चंडीगढ़ और कुल्लू में मेकअप आर्टिस्ट का प्रशिक्षण लेने के बाद वह यही कार्य कर रही है। उन्होंने कहा तीन साल पहले वह विंटर क्वीन स्पर्धा में भाग ले चुकी हैं। वह ट्रेडिशनल राउंड में बाहर हो गई थी। लेकिन हार नहीं मानी और मेहनत करती रही। 

सौंदर्य प्रतियोगिताओं को दूंगी बढ़ावा : भाव्या
मिस डीपीएस, मिस चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी का खिताब जीतने वाली मनाली के डोभी की भाव्या का लक्ष्य सौंदर्य प्रतियोगिताओं को बढ़ावा देना है। उसका कहना है कि विंटर क्वीन की अन्य विजेताओं के साथ मिलकर वह इसके लिए कार्य करेंगी।  वह एमबीए कर रही हैं। भाव्या के पिता अनिल शर्मा बागवान जबकि माता बिंदिया शिक्षिका हैं। उन्होंने कहा कि माता पिता के प्रेरित करने पर ही वह इस मुकाम पर पहुंची है।
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मॉडलिंग में लड़कियों को तराशेंगी कोहिनूर
विंटर क्वीन स्पर्धा में फर्स्ट रनरअप रही शिमला के ननखरी की कोहिनूर सरकेक इसी क्षेत्र में नाम कमाने को बेताब हैं। वह लड़कियों को तराशने का काम करेंगी। अधिक से अधिक लड़कियों को इस फील्ड में आगे लाएंगी।  इंजीनियर राकेश सरकेक और माता ज्योति के घर जन्मी कोहिनूर मिस ट्रीन ऑफ इंडिया और मिस हिमाचल के खिताब जीत चुकी हैं। एमबीए की पढ़ाई करने के साथ में मॉडलिंग में भविष्य तलाशेगी। ग्रूमर बनकर वह हिमाचल की अधिक से अधिक लड़कियों को आगे लाने का काम करेंगी। 

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