तिब्बत की आजादी के लिए धर्मशाला में निकाली रैली।
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हिमाचल प्रदेश के कुल्लू धर्मशाला में तिब्बत की आजादी के लिए आवाज बुलंद की गई। सैकड़ों तिब्बती लोगों ने सड़कों पर उतरकर चीन के खिलाफ नारेबाजी की। तिब्बतियों ने हनुमानी बाग से ढालपुर चौक, पुलिस अधीक्षक कार्यालय, न्यायालय परिसर, उपायुक्त कार्यालय, क्षेत्रीय अस्पताल, कॉलेज चौक, लालचंद प्रार्थी कलाकेंद्र होते हुए परेड मैदान तक रैली निकाली। इसके बाद तिब्बत और भारत के राष्ट्रगान से 64वें तिब्बती राष्ट्रीय जनक्रांति दिवस का शुभारंभ किया। इसके अलावा तिब्बत की आजादी के लिए आत्मदाह करने वालों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। तिब्बती समुदाय के वेलफेयर ऑफिसर थुपचेन दोफेल ने कहा कि 10 मार्च 1959 में तिब्बतियों ने तिब्बत पर चीनी सरकार के कब्जे के खिलाफ शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन किया था। उसी दिन को याद करते हुए शुक्रवार को कुल्लू जिले में रैली निकालकर तिब्बत की आजादी के लिए आवाज उठाई गई। उन्होंने कहा कि 10 मार्च को 64वें तिब्बती राष्ट्रीय जनक्रांति दिवस के अलावा तिब्बतियों की अहिंसक विरोध की 15वीं वर्षगांठ भी मनाई गई। कहा कि चीन के कब्जे के बाद तिब्बत में स्थानीय लोगों को जीने की मूलभूत सुविधाओं का भी अधिकार नहीं है। न शिक्षा, न धर्म, न ही चलने-फिरने की आजादी है। हमें तिब्बत के अंदर धर्म और संस्कृति की आजादी चाहिए। इस दौरान टशी पलजोर, हीरालाल ठाकुर आदि उपस्थित रहे। संवाद
सैकड़ों लोगों ने मैक्लोडगंज से लेकर धर्मशाला तक निकाली रैली
अपने 64वें जनक्रांति दिवस के मौके पर तिब्बती समुदाय के सैकड़ों लोगों ने धर्मशाला में चीन सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान मैक्लोडगंज से लेकर धर्मशाला 10 किलोमीटर तक एक रैली भी निकाली। तिब्बत की आजादी को लेकर चीन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। रैली में तिब्बतियन यूथ कांग्रेस, तिब्बती महिला एसोसिएशन, नेशनल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ तिब्बत और स्टूडेंट फॉर फ्री तिब्बत इंडिया सहित कई संगठनों ने भाग लिया। वहीं निर्वासित तिब्बत संसद ने इस अवसर पर जारी वक्तव्य में कहा कि तिब्बत में रह रहे तिब्बतियों की चीन की दमनकारी नीतियों सहित कई तरह की यातनाओं को सहना पड़ रहा है। ऐसे में अपने देश की आजादी की जंग में विद्रोह करते हुए कई तिब्बती चीनी सेना ने मार दिए हैं। आज उन बलिदानियों को भी तिब्बती समुदाय याद कर रहा और तिब्बत में चीन की दमनकारी नीतियों का विरोध कर रहा है।
वहीं इस दौरान उन्होंने दलाई लामा की लंबी उम्र की कामना भी की। निर्वासित तिब्बत संसद ने कहा कि तिब्बत में चीन वहां की कला संस्कृति व ऐतिहासिक धरोहरों के साथ छेड़छाड़ करके उन्हें समाप्त कर देना चाहता है। तिब्बत में वहां के लोग नरक जैसा जीवन व्यतीत कर रहे हैं। तिब्बती की आजादी के लिए वीर तिब्बती महिला पुरुष बलिदान दे रहे हैं,उन सभी को तिब्बती राष्ट्रीय विद्रोह के दिन याद किया जाता है। वहीं निर्वासित तिब्बत सरकार के प्रधानमंत्री पेंपा सेरिंग ने कहा कि आज हमारा शहीदी दिवस भी है। हम सभी अपने उन देशभक्तों की वीरता को याद करते हैं, जिन्होंने तिब्बत की आजादी के लिए अपने प्राण न्योछावर किए हैं। उन्होंने निर्वासित तिब्बत प्रशासन की ओर से तिब्बत की धार्मिक, राजनीतिक और जातीय पहचान के लिए अपना सब कुछ बलिदान करने वाले उन देशभक्तों के साहस व कार्यों के प्रति अपनी श्रद्धाजंलि भी दी।