तमिलनाडु के महाबलिपुरम में 11 और 12 अक्तूबर को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के दौरे से पहले कुछ तिब्बती छात्रों को घर पर ही नजरबंद करने और उनसे बेवजह पूछताछ करने के आरोप लगे हैं।
यह आरोप कोर ग्रुप फोर तिब्बतियन कॉज-इंडिया ने लगाए हैं। संस्था के राष्ट्रीय समन्वयक आरके खरीमे ने आरोप लगाया कि चीनी राष्ट्रपति के भारत दौरे से पहले तिब्बतियों की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में ये तिब्बती छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। इन्हें बेवजह तंग किया जा रहा है। देश में भारतीय संविधान सभी लोगों को अन्याय के खिलाफ विरोध करने का अधिकार देता है। यह अधिकार तिब्बतियों पर भी बराबर लागू होता है।
पिछले 60 साल में भारत ने कभी भी तिब्बती लोगों की आवाज नहीं दबाई। संस्था ने इसके लिए तमिलनाडु सरकार की आलोचना करते हुए छात्रों को तुरंत रिहा करने की मांग की है।