आक्सीजन की दिक्कत और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कोई भी इंतजाम नहीं है, लेकिन मन में मुरादें और भक्ति के आगे इन महिला भक्तों के हौसले बुलंद हैं।त्रिलोकीनाथ से मणिमहेश तक पैदल यात्रा में इन भक्तजनों को पांच से छह दिन का एकतरफा लगेंगे।
यात्रा में कठिन परिस्थितियों के बीच खुले आसमान तले रातें भी गुजारनी पड़ती हैं। इस जत्थे में कुल 12 महिलाएं हैं। लाहौल के ऐतिहासिक पौरी मेले के समापन होते ही त्रिलोकीनाथ से लाहौल एवं कुल्लू के सैकड़ों भक्तों का जाना शुरू हो गया है।
मंगलवार को यह जत्था बाबा मणिमहेश का जयघोष करते हुए खोलडु पधर से आगे बढ़ गए हैं। जत्थे में शामिल अन्य महिला श्रद्धालु अर्चना और कमला ने बताया कि अब आगे परिस्थिति
कितनी भी मुश्किल क्यों न हो, भक्ति के आगे उनके कदम बिल्कुल नहीं डगमगाएंगे। पुलिस अधीक्षक लाहौल-स्पीति राजेश धरमाणी ने श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दी हैं।