नालागढ़ में चिकित्सा उपकरण पार्क में उद्योग स्थापित करने पर कंपनी को 10 साल तक तीन रुपये प्रति यूनिट बिजली मिलेगी। यही नहीं, निवेश करने वाली कंपनी को सरकार 10 साल तक 51 लाख रुपये का अनुदान देगी। उद्योग में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए स्थापित कॉलोनी के रखरखाव का पैसा भी सरकार नहीं वसूलेगी और पानी भी निशुल्क मिलेगा।
हिमाचल प्रदेश के नालागढ़ में चिकित्सा उपकरण पार्क में उद्योग स्थापित करने पर कंपनी को 10 साल तक तीन रुपये प्रति यूनिट बिजली मिलेगी। यही नहीं, निवेश करने वाली कंपनी को सरकार 10 साल तक 51 लाख रुपये का अनुदान देगी। उद्योग में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए स्थापित कॉलोनी के रखरखाव का पैसा भी सरकार नहीं वसूलेगी और पानी भी निशुल्क मिलेगा। उद्योग स्थापित करने के लिए एक रुपये प्रति एकड़ लीज पर जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। यह 33 साल तक रहेगी।
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उद्योग विभाग के निदेशक राकेश प्रजापति, अतिरिक्त निदेशक तिलकराज शर्मा और जीएम नालागढ़ साक्षी ने दिल्ली में मेडिकल डिवाइस एसोसिएशन के साथ बैठक की। उन्हें इन्वेस्टर्स मीट में शामिल होने का न्योता दिया। इसके बाद विभागीय अधिकारियों ने आंध्र प्रदेश जाकर स्थापित चिकित्सा उपकरण पार्क स्थापित करने वाले उद्योगपति से मुलाकात कर पार्क का निरीक्षण किया। यह साउथ एशिया का सबसे बड़ा डिवाइस पार्क है।
उन्हें भी लैब व उद्योग स्थापित करने के लिए हिमाचल आने का न्योता दिया। नालागढ़ में यह पार्क 265 एकड़ जमीन पर 266.95 करोड़ रुपये की लागत से विकसित होगा। केंद्र सरकार पार्क बनाने के लिए 100 करोड़ की ग्रांट इन एड जारी करेगी। शेष 160.95 करोड़ रुपये प्रदेश सरकार खर्च करेगी। मेडिकल डिवाइस पार्क में 5000 करोड़ का निवेश होगा और 20000 करोड़ का सालाना टर्न ओवर होगा। मेडिकल डिवाइस पार्क में स्थापित होने वाले उद्योगों में प्रदेश के 10000 लोगों को रोजगार मिलेगा। पूरे देश में सिर्फ चार मेडिकल डिवाइस पार्क बनने हैं।
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मेडिकल क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों का होगा उत्पादन
प्रदेश की पहले ही फार्मा उद्योगों के हब के रूप में अपनी पहचान है। मेडिकल डिवाइस पार्क बनने से यहां पर मेडिकल क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों का उत्पादन होगा। इस पार्क के विकसित होने से नालागढ़ की पहचान मेडिकल उपकरण बनाने वाली इकाइयों के रूप में भी हो सकेगी।