सुबह चार बजे स्नान कर किया पूजा पाठ, सैकड़ों लोगों ने ग्रहों की शांति के लिए कराया तुलादान
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संक्रांति के साथ शुरू हुआ तीन दिवसीय मेला संवाद न्यूज एजेंसी शिमला। तत्तापानी में मकर संक्रांति पर हजारों लोगों ने पवित्र स्नान किया। ऐतिहासिक स्थल तत्तापानी में बुधवार सुबह ही लोग पहुंचना शुरू हो गए थे। सुबह चार बजे से लोगों ने स्नान करना शुरू कर दिया।
लोगों के अनुसार मान्यता है कि यहां स्नान करने से शरीर से सभी तरह के चर्म रोग दूर होते हैं। कई लोगों ने आज इस पावन अवसर पर ग्रह शांति के लिए तुलादान भी करवाया। इसके साथ ही लोगों ने खिचड़ी दान कर प्राचीन परंपरा का निर्वहन किया। हिंदू पंचाग के अनुसार माघ महीने के पहले दिन आज से ही यहां तीन दिवसीय जिला स्तरीय मेला भी शुरू हो गया है। प्रशासनिक दृष्टि से यह मेला तीन दिन चलता है लेकिन कारोबार एक महीना चलता रहेगा।
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पंडित दिवाकर शर्मा ने बताया कि लोग नव ग्रह की शांति के लिए यहां तुलादान करवाने आते हैं। यहां पर गर्म पानी के चश्मे थे। लोग सतलुज किनारे स्नान करते थे। अब गर्म पानी के चश्मे कोल बांध परियोजना में डूब गए हैं। अब स्नान करने के लिए सतलुज किनारे व्यवस्था की है। मकर संक्रांति के अलावा हर शनिवार को यहां श्रद्धालु आते हैं। पंडित हरीश ने कहा कि माघ महीने में जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो इसमें तुला दान का विशेष महत्व होता है। जगह-जगह प्रसाद के रूप में लोगों को खिचड़ी भी परोसी गई। पंडित रिंकू शर्मा जमोग निवासी ने बताया कि साल 2020 तत्तापानी के नाम खिचड़ी पकाने का विश्व रिकॉर्ड भी है। यहां साल 2020 में मकर संक्रांति पर एक ही बर्तन में 1995 किलोग्राम खिचड़ी बनाई गई थी।
तत्तापानी के चश्मों की मान्यता
तत्तापानी में गर्म पानी के चश्मों की उत्पत्ति के बारे में तरह-तरह की मान्यताएं हैं। स्थानीय व्यक्ति घनश्याम के अनुसार कुछ लोगों का मानना है कि प्राचीनकाल में इस क्षेत्र में परशुराम के पिता ऋषि जमदग्नि तपस्या कर रहे थे। उन्होंने इस तपोस्थली में गर्म पानी के चश्मे प्रकट किए। एक अन्य मान्यता के अनुसार परशुराम ने मणिकर्ण में स्नान किया था। उन्होंने जब अपने वस्त्र यहां आकर निचोड़े तो यहां भी गर्म पानी निकल गया। वैज्ञानिक पहलु के अनुसार यहां गंधक के पहाड़ हैं। इनसे गैस बनती है और उनसे गर्म पानी निकलता है।