वहीं, साल 2013 में लागू किए रूसा सिस्टम के तहत विद्यार्थियों को च्वाइस बेस क्रेडिट सिस्टम दिया गया था। इस सिस्टम के चलते विद्यार्थियों ने 2015 तक मेडिकल, नॉन मेडिकल और आर्ट्स के विषयों का कंबिनेशन बनाकर स्नातक कर ली। अब टीजीटी भर्ती में यह विद्यार्थी गलत सब्जेक्ट कंबिनेशन के कारण अपात्र हो गए हैं।
इस मामले को लेकर प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश विश्वविद्यालय को पत्र जारी कर जल्द इक्वीलेंस कमेटी की बैठक बुलाने को कहा है। निदेशक रोहित जमवाल ने बताया कि इस मामले को सुलझाने के लिए जल्द ही विवि प्रशासन के साथ बैठक की जाएगी।
साल 2016 में प्रदेश विश्वविद्यालय ने पूर्व निर्धारित सब्जेक्ट कंबिनेशन बदल दिए हैं। यूजीसी की गाइडलाइन के मुताबिक नई व्यवस्था के तहत प्रावधान किया गया है कि मेडिकल, नॉन मेडिकल और आर्ट्स लेने वाले विद्यार्थियों को अपने विषय से जुड़े सब्जेक्ट पढ़ना जरूरी होंगे।