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Shimla News: कांग्रेस में गुटबाजी नहीं, सरकार का फैसला सभी को होगा मंजूर

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मेयर-डिप्टी मेयर चुनाव पर गरमाई सियासत पर महापौर सुरेंद्र चौहान का दावा, बोले-पार्षदों को है अपनी बात रखने का हक
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सरकार जो भी फैसला लेगी, वह मुझे भी मान्य होगा : चौहान
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में मेयर-डिप्टी मेयर चुनाव पर गरमाई सियासत को महापौर सुरेंद्र चौहान गुटबाजी नहीं मानते। महापौर का कहना है कि मेयर और डिप्टी मेयर का ढाई साल का कार्यकाल नवंबर में पूरा हो रहा है। इसलिए पार्टी के पार्षद अपनी बात मंत्री और विधायक के पास रख रहे हैं। महापौर ने कहा कि इसमें कुछ गलत नहीं है। सभी पार्षदों को अपनी बात रखने का हक है।
दावा किया कि मंत्री और विधायकों के पास गए कई पार्षद उनके संपर्क में भी हैं। यह पार्षद उनका विरोध नहीं कर रहे हैं। सिर्फ मेयर या डिप्टी मेयर पद पर खुद को मौका देने की बात रख रहे हैं। महापौर सुरेंद्र चौहान ने कहा कि नगर निगम सदन में कांग्रेस में कोई गुटबाजी नहीं है। शहर का विकास हमारा प्राथमिकता है। पिछले ढाई साल में शहर में करोड़ों रुपये के काम किए हैं। कांग्रेस ही नहीं, भाजपा के वार्डाें में भी बिना किसी भेदभाव के काम किया है। आगे भी यह विकास जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि सरकार मेयर और डिप्टी मेयर के लिए जिसे भी जिम्मेदारी सौंपेगी वह मुझे और हमारे सभी पार्षदों को मान्य होगी। रोस्टर में संशोधन को लेकर चली अटकलों पर महापौर ने कहा कि यह अधिकार सरकार के पास है। सरकार तय करती है कि रोस्टर बदलना है या नहीं। उन्होंने कहा कि धूमल सरकार के समय भी रोस्टर में बड़ा बदलाव हुआ था, उस समय मेयर और डिप्टी मेयर पद पर सीधे चुनाव हुए थे।
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सरकार तय करेगी जिम्मेदारी : कौशल
नगर निगम उप महापौर उमा कौशल ने कहा कि सरकार ही इस पर अंतिम फैसला लेगी। सरकार जो चाहेगी, वही लागू किया जाएगा। कहा कि पार्षदों की लॉबिंग पर फिलहाल उन्हें कुछ नहीं कहना है। नगर निगम में सभी पार्षद एकजुट हैं।
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रोस्टर के अनुसार महिला को मिलेगा मेयर पद
रोस्टर के अनुसार अब महिला पार्षद को नगर निगम महापौर का पद मिलना है। इसमें सामान्य वर्ग और आरक्षित वर्ग की महिला पार्षद अपनी दावेदारी पेश कर सकती हैं। हालांकि सरकार वर्तमान महापौर सुरेंद्र चौहान को ही अगले ढाई साल के लिए इस पद पर रखने जा रही है। इसके लिए रोस्टर में संशोधन किया जाना है। इसी हफ्ते होने वाली कैबिनेट की बैठक में इस पर फैसला आ सकता है। महापौर का कार्यकाल आने वाले समय में भी पांच साल करने की चर्चा है।
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