जंक्शन बनने के कारण यहां एक साथ कई दिशाओं में अलग-अलग वाहनों को जाने के लिए रास्ता होगा। इस राउंउ अबाउट में कुल पांच रैंप होंगे। जबकि दो स्लिप रोड होंगे। यह राउंड अबाउट ब्यास नदी में बनने वाले मेजर पुल से जुड़ेगा। इसी के साथ आगे दो छोटे पुल भी होंगे और 1.8 किमी लंबा फोरलेन बनेगा। टनल से जुड़कर यह सीधे बिजनी पहुंचेगा। बता दें कि बिजनी-मंडी कुल 5.357 किलोमीटर लंबे प्रोजेक्ट पर 971.99 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसमें 3.5 किलोमीटर लंबी टनल भी बनाई जा रही है। एक बड़ा और दो छोटे पुल भी बनाए जाएंगे। वर्ष 2027 के आखिर तक इस प्रोजेक्ट के पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रोजेक्ट के बनने के बाद जोगिंद्रनगर की तरफ से आ रहा यातायात सीधे टनल से होकर बिंद्रावणी पहुंचेगा। यहां से मनाली और चंडीगढ़ का रुख किया जा सकेगा। इससे मंडी शहर पर यातायात का बोझ कम होगा।
गोल चक्कर में इस तरह होंगे रैंप और स्लिप रोड
रैंप-1 मंडी टाउन और नेर चौक से पठानकोट की ओर जाने वाला रास्ता।
रैंप-2 पठानकोट से मनाली जाने वाला रास्ता।
रैंप 3 व 4 मनाली से मंडी टाउन की ओर जाने वाला रास्ता।
रैंप-5 पठानकोट से नेर चौक की ओर जाने वाला रास्ता।
स्लिप रोड-1 मंडी टाउन से मनाली जाने वाला स्लिप रोड।
स्लिप रोड-2 मनाली से मंडी टाउन की ओर जाने वाला स्लिप रोड।
यह होता है एलिवेटेड जंक्शन
एलिवेटेड जंक्शन एक ऐसा चौराहा होता है जहां सड़क या रेलवे लाइन को जमीन के स्तर से ऊपर उठाकर बनाया जाता है, ताकि यातायात सुगम हो सके और जाम या टकराव से बचा जा सके। यह पुल या संरचना के रूप में होता है, जिससे विभिन्न दिशाओं से आने वाले वाहन बिना किसी रूकावट के एक-दूसरे को पार कर सकते हैं।
बिजनी-मंडी परियोजना का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। यातायात सुगम बनाने के लिए बिंद्रावणी में एलिवेटेड जंक्शन बनाया जा रहा है। इस तरह का एलिवेटेड जंक्शन फिलहाल हिमाचल में नहीं है। यहां पहली बार बनाया जा रहा है। -वरुण चारी, परियोजना निदेशक, एनएचएआई मंडी इकाई।