प्रदेश सरकार ने भले ही कैबिनेट में हिमाचल में तीन और नगर निगम बनाने पर सहमति दे दी हो लेकिन, धरातल पर इन्हें बनाना इतना आसान नहीं है। नियमों के तहत एक नगर निगम की आबादी 50 हजार और इससे अधिक होनी चाहिए। जबकि, सोलन नगर परिषद की आबादी 40 हजार है। इसी तरह मंडी नगर परिषद की आबादी भी 27 हजार के आसपास है। बीबीएन को भी निगम बनाना आसान नहीं है। सरकार के पास भले ही पंचायतों को नगर निगम में शामिल करने का विकल्प हो लेकिन, यह भी स्पष्ट है कि लोग इतनी आसानी से निगम में शामिल नहीं होंगे।
अभी पंचायतों में लोग अपनी मर्जी से मकान बना रहे हैं। बिजली, पानी और सीवरेज के कनेक्शन लेने के लिए विभागों के चक्कर नहीं काटने पड़ते हैं। लेकिन, जब नगर निगम में पंचायतें शामिल हो जाएंगी, उसके बाद सुविधाओं के लिए नगर निगम से एनओसी लेने पड़ेंगे। लोग अपनी मर्जी से भवनों का निर्माण नहीं कर सकेंगे। इसके लिए नगर निगम से नक्शा पास कराना पड़ेगा। मूलभूत सुविधाओं के लिए लोगों को टैक्स देने पड़ेंगे। धर्मशाला को नगर निगम बनाने के लिए जिन पंचायतों को शामिल किया गया है, आज तक क्षेत्र के लोग इसका विरोध कर रहे हैं।