सामरिक महत्व की अटल रोहतांग टनल कई मायनों में अहम है। 8.8 किलोमीटर लंबी टनल के साथ एक ओर भूमिगत सुरंग का निर्माण किया गया है। इसका काम पिछले सप्ताह पूरा हो गया है। बीआरओ ने इसका निर्माण भी आधुनिक तकनीक से किया है। वन-वे बनाई गई इस टनल की लंबाई भी अटल टनल रोहतांग की लंबाई के बराबर 8.8 किलोमीटर है। आपदा से निपटने के लिए आपातकालीन टनल का निर्माण किया गया है।
इसमें भी रात-दिन बिजली की व्यवस्था रहेगी। हालांकि, टनल आवाजाही के लिए पूरी तरह से सुरक्षित है। बावजूद इसके किसी भी आपदा से निपटने के लिए भूमिगत आपातकालीन टनल अहम भूमिका निभाएगी। इस टनल का काम पूरा होते ही अब प्रबंधन का पूरा फोकस ट्रैफिक टनल पर है। सितंबर में टनल के उद्घाटन की तारीख जैसे ही नजदीक आ रही है, बीआरओ ने भी अपने काम को गति प्रदान कर दी है। बताया जा रहा है कि भूमिगत बनी आपातकालीन टनल के बाद अब मुख्य अटल टनल का अधिकतर कार्य पूरा हो चुका है।
मनाली-लेह मार्ग का लगभग 45 किलोमीटर सफर कम होगा
भारत-चीन के साथ पाकिस्तान की सीमा को जोड़ने वाले मनाली-लेह मार्ग के बीच रोहतांग दर्रे के नीचे बन रही अटल टनल के उद्घाटन से सेना की कानवाई को आने-जाने में आसानी होगी। टनल से मनाली-लेह मार्ग का लगभग 45 किलोमीटर का सफर कम होगा। जिसको पूरा करने में मनाली से कोकसर तक करीब चार घंटे का समय लगता है।
इसके साथ ही साल में छह से सात माह तक देश दुनिया के अलग-थलग रहने वाली लाहौल घाटी भी जुड़ी रहेगी। हजारों लोगों के पलायन के साथ लाहौल घाटी पर्यटन की दृष्टि से भी विकसित होगी। टनल के मुख्य अभियंता ब्रिगेडियर केपी पुरुषोतमन ने कहा कि अटल टनल रोहतांग के अंदरूनी भाग का काम चल रहा है।