शिमला। राजधानी के कोर एरिया की सबसे बड़ी लिफ्ट पार्किंग का विवाद अब सरकार के दरबार पहुंच गया है। सरकार ने इसके अधिग्रहण की भी तैयारी कर ली है। आने वाले दिनों में नगर निगम के माध्यम से इस पार्किंग के अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है।
नगर निगम की ओर से शनिवार को पार्किंग संचालक को जो नोटिस जारी किया गया है, उसमें भी पार्किंग अधिग्रहण का जिक्र किया गया है। इस नोटिस में संचालक को 24 घंटे के भीतर पार्किंग खोलने के आदेश जारी किए गए थे। लेकिन नगर निगम के यह आदेश बेअसर साबित हुए। लिफ्ट पार्किंग लगातार तीसरे दिन रविवार को भी बंद रही। पार्किंग के गेट पर ताला लगा रहा और गाड़ियां खड़ी करने के लिए दिनभर सैलानी और शहरवासी भटकते रहे। उधर, संचालक ने रविवार को नगर निगम के नोटिस का जवाब भी दे दिया। संचालक का कहना है कि जब तक नगर निगम बिजली और पानी के कनेक्शन बहाल नहीं करता, तब तक पार्किंग नहीं खुलेगी। नोटिस का जवाब मिलने के बाद सोमवार को नगर निगम प्रशासन अब बड़ा फैसला ले सकता है।
सूत्रों के अनुसार सरकार की ओर से इस मामले पर नगर निगम को स्पष्ट दिशा निर्देश जारी हो चुके हैं। इस पार्किंग को अधिग्रहण करने को लेकर भी चर्चा हो चुकी है। साल 2017 में खुली इस पार्किंग से अभी तक सरकार को पैसा नहीं मिला है। ऐसे में सरकार इस मामले पर सख्त है। हाल ही में नगर निगम के साथ हुई समीक्षा बैठक में इस पार्किंग को लेकर सख्त दिशा निर्देश जारी हुए हैं।
30 साल बाद भी निगम को ही मिलनी है पार्किंग
करीब 56 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस पार्किंग को पीपीपी मोड पर बनाया गया है। संचालक के अनुसार 653 गाड़ियां यहां पार्क हो सकती हैं। एमओयू के अनुसार 30 साल बाद यह पार्किंग नगर निगम को सौंपनी होगी। अभी जो कमाई होगी, उसका कुछ हिस्सा नगर निगम को देना होगा। साल 2017 में पार्ट कंपलीशन के बाद इस पार्किंग का कुछ हिस्सा खोला गया था। निगम का दावा है कि अभी तक संचालक ने निगम का शेयर नहीं दिया है।
एमसी को पैसा देने का मामला विचाराधीन
हमने नगर निगम के नोटिस का जवाब दे दिया है। बिना बिजली पानी के पार्किंग नहीं खोल सकते। नगर निगम कह रहा है कि पार्किंग टेकओवर कर लेंगे। यदि टेकओवर करते हैं तो क्या बिजली-पानी फिर भी बंद रहेगा। पार्किंग से नगर निगम को पैसा देना है या नहीं, यह मामला विचाराधीन है। सेवानिवृत्त न्यायाधीश इस मामले को देख रहे हैं। इसमें जो भी फैसला आएगा, वह हम मानेंगे। उनके फैसले से पहले ही नगर निगम की ऐसी कार्रवाई गलत है। -गौरव सूद, संचालक लिफ्ट पार्किंग
सरकार को एक पैसा तक नहीं दिया, करेंगे अधिग्रहण: जनारथा
करीब पांच साल से चल रही इस पार्किंग की कमाई से सरकार को एक पैसा तक नहीं दिया गया। दूसरी ओर संचालक निर्माण नियमों का उल्लंघन कर रहा है। एमओयू के अनुसार व्यावसायिक गतिविधियां पार्किंग की निचली मंजिलों पर करने की अनुमति थी, लेकिन इसने ऊपर की मंजिलों पर ही शुरू कर दीं। नगर निगम ने कार्रवाई की तो संचालक ने मनमर्जी से पार्किंग बंद कर दी। जनता को सुविधा से वंचित रखना गलत है। यदि पार्किंग न खोली तो सरकार इसे वापस ले लेगी। हाल ही में सरकार ने बैठक में इसकी समीक्षा भी की है। इसके अधिग्रहण को लेकर भी चर्चा हुई है।
-हरीश जनारथा, शहरी विधायक
हम खुद चलाएंगे पार्किंग: आयुक्त
संचालक यदि पार्किंग नहीं चलाता है तो अब नगर निगम इसे खुद चलाएगा। सोमवार को बैठक कर इसके संचालन की व्यवस्था की जाएगी। शहर की जनता को असुविधा नहीं होने दी जाएगी।
आशीष कोहली, आयुक्त नगर निगम शिमला।