अरुणाचल में चीन बॉर्डर पर सरहद की निगरानी के लिए तैनात बिलासपुर जिले के सेऊ गांव के 22 वर्षीय सैनिक अंकेश भारद्वाज सहित सात जवान अन्य सैनिकों को रेस्क्यू करने के लिए पहाड़ियों में गए थे। जिन जवानों को रेस्क्यू करना था वह सकुशल लौट आए और रेस्क्यू करने गई सात जवानों की टीम बर्फ के बवंडर में फंस गई और देश के लिए शहीद हो गई। शहीद सैनिक अंकेश के पिता ने बताया कि 5 फरवरी को अरुणाचल के कामेंग सेक्टर में एक टीम पहाड़ियों के बीच फोन कनेक्टिविटी को दुरुस्त करने गई थी। उस टीम को निर्धारित समय पर कैंप लौटना था, लेकिन टीम नहीं लौटी और उन जवानों के साथ कनेक्टिविटी भी टूट चुकी थी। समय बीत जाने के बाद जवानों की खोज और रेस्क्यू के लिए सात सैनिक भेजे गए, जिसमें उनका बेटा भी शामिल था।
जिस टीम को रेस्क्यू करना था वह टीम मौसम खराब होने के कारण दूसरे रास्ते से कैंप तक पहुंच गई, लेकिन रेस्क्यू करने गए टीम आगे बढ़ती रही। एकाएक मौसम खराब हो गया और बर्फीले तूफान में सात जवान लापता हो गए। सात जवान जब नहीं लौटे तो सेना के अन्य सैनिकों ने टीम को खोजने का काम शुरू किया। तब पता चला कि रेस्क्यू करने गई टीम बर्फीले तूफान में दब गई है। तीन दिन खोजने के बाद सात जवानों के शहीद होने का पता चला। बताया जा रहा है कि जिस जगह यह हादसा हुआ वहां पर ऊंची-ऊंची पहाड़ियां हैं, दुर्गम रास्ते हैं। मौसम खराब होने के कारण हेलिकॉप्टर भी रेस्क्यू ऑपरेशन में भाग नहीं ले पाया। भूटान व सिक्किम से रेस्क्यू टीमें पहुंचीं, लेकिन बर्फीले तूफान में दबे सैनिकों को सलामत नहीं लाया जा सका।