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Himachal News: नया उच्च वेतनमान नहीं देने पर हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से मांगा स्पष्टीकरण

Sat, 06 Dec 2025 10:20 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।

सार

 प्रदेश हाईकोर्ट ने श्रम कल्याण अधिकारी के पद पर नियमित किए गए कर्मचारियों को उनके नए वेतनमान के अनुसार वेतन न दिए जाने के मामले में सुनवाई की।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने श्रम कल्याण अधिकारी के पद पर नियमित किए गए कर्मचारियों को उनके नए वेतनमान के अनुसार वेतन न दिए जाने के मामले में सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि नियमितीकरण के बावजूद उन्हें अभी भी कॉन्ट्रेक्ट अवधि वाला पुराना वेतन ही मिल रहा है। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने इस मामले में कोई आदेश पारित करने से पहले राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि वे एक सप्ताह के भीतर मामले में उचित निर्देश प्राप्त करें और स्पष्टीकरण दे कि नियमितीकरण के बावजूद नया वेतन जारी क्यों नहीं किया गया।

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मामले की अगली सुनवाई 15 दिसंबर को होगी
मामले की अगली सुनवाई 15 दिसंबर को होगी। याचिकाकर्ताओं को शुरुआत में अनुबंध आधार पर श्रम कल्याण अधिकारी, क्लास-2 (राजपत्रित) के पद पर नियुक्त किया गया था। उन्हें हिमाचल प्रदेश सिविल सेवा (संशोधित वेतन) नियम, 2022 के अनुसार, लेवल-16 के पहले सेल का 60 फीसदी यानी 29,220 प्रति माह का निश्चित अनुबंध मानदेय मिल रहा था।  7 जुलाई 2025 को उनकी सेवाओं को 10,300-34,800 के पे बैंड में 5,000 ग्रेड पे के साथ नियमित गया था, जो लेवल-16 के वेतन मैट्रिक्स के बराबर है। कर्मचारियों का कहना है कि नियमितीकरण के बावजूद, उन्हें अभी भी अनुबंध पर मिलने वाला पुराना वेतन 29,220 ही दिया जा रहा है।
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स्टोन क्रशर की दूरी के मापदंडों पर हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
प्रदेश हाईकोर्ट ने ग्रामीण आबादी से स्टोन क्रशर की दूरी के संबंध में निर्धारित मानदंडों के कथित उल्लंघन को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। अदालत ने ग्राणीण आबादी से स्टोन क्रशर की दूरी के मापदंडों पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में बताया गया है कि हमीरपुर के गलोड़ में एक स्टोन क्रशर स्थापित करने का प्रस्ताव है जो ग्राम आबादी-देह से दूरी के संबंध में 29 जून 2021 की अधिसूचना में निर्धारित मानदंडों का उल्लंघन करता है। याचिकाकर्ता ने साइट अप्रेजल कमेटी की 27 सितंबर 2024 की रिपोर्ट के आधार पर दी गई सहमति पर सवाल उठाया है, जिस तारीख से पंजीकरण दिया गया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावलिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने निजी प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है। अदालत ने चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 23 फरवरी 2026 को होगी।
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