अभी तक नहीं बन पाए स्पेशल वार्ड, कई जगह चला है मरम्मत कार्य, मरीजों को होना पड़ता है परेशान न्यूरो वार्ड के आधे हिस्से में लगाए गए हैं दस बिस्तर चार वार्ड गायनी मरीजों को देने का किया है दावा
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। कमला नेहरू अस्पताल से गायनी ओपीडी को आधी-अधूरी तैयारियों के साथ इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) में शिफ्ट किया गया है। इसका अंदाजा यहीं से लगाया जा सकता है कि वर्तमान में गायनी वार्ड में मरम्मत चली हुई है। इससे महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
हालात यह है कि आधे न्यूरो वार्ड में भी 10 बिस्तरों पर गायनी के मरीजों को उपचार दिया जा रहा है। ऐसे में संक्रमण फैलने से मरीजों को ओर दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि अस्पताल प्रबंधन का दावा कि है कि गायनी मरीजों के लिए 50 बिस्तरों की व्यवस्था जल्द होगी। इसके साथ अस्पताल में पर्याप्त स्पेशल वार्ड भी गायनी मरीजाें के लिए नहीं हैं। ऐसे में जो महिलाएं स्पेशल वार्ड लेना चाहती हैं उन्हें काफी परेशानी हो रही है। गायनी वार्ड के पुराने भवन के पांचवें फ्लोर में गायनी मरीजों के लिए वार्ड की व्यवस्था की गई है। इस फ्लोर में चार कमरों में वार्ड बनाने के लिए दिए हैं, जिसमें एक वार्ड अभी तक तैयार नहीं हो सका है। वार्ड में मिट्टी और सीमेंट के कट्टे पड़े हैं। अभी तक वार्ड में केवल 50 फीसदी ही कार्य हो सका है। इस कमरे की हालत को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि आगामी सप्ताह में कार्य पूरा होगा। बताया जा रहा है कि इसके बाद अन्य कमरों की फ्लोरिंग का कार्य होना है। इससे पहले इस वार्ड की मरम्मत शुरू हुई है। वहीं अस्पताल प्रबंधन का मानना है कि अभी गायनी से संबंधित अधिक महिला मरीज अस्पताल में भर्ती नहीं हो हुए हैं। वार्ड में कई बिस्तर खाली हैं।
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कोट आईजीएमसी में व्यवस्थाओं को पूरा करने के बाद ही अस्पताल को शिफ्ट करना चाहिए था। दो विभागों को इस तरह बांट कर ओपीडी कम हो गई है। मरीज अब असमंजस में फंसने की बजाय चंडीगढ़ और अन्य अस्पतालों में जाना शुरू हो गए हैं। केएचएच का स्टाफ भी अब कहने लगा है कि सरकार को पूरा अस्पताल शिफ्ट करना चाहिए था। मांग की कि इस निर्णय पर एक बार फिर से चिंतन करना चाहिए। मातृ एवं शिशु, प्रसूति और गायनी वार्ड को एक जगह ही कर दिया जाए।
कोट वार्ड में कक्ष की मरम्मत जल्द पूरी हो जाएगी। इसके बाद बिस्तर लगा दिए जाएंगे। 50 बिस्तर वर्तमान में गायनी विभाग को दिए हैं। वर्तमान में जितने महिला मरीज अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं उनके लिए पर्याप्त व्यवस्था है। महिलाओं को किसी भी प्रकार की परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। -डॉ. सीता ठाकुर प्रिंसिपल, आईजीएमसी