खुद अपने आय के साधन जुटाने होंगे
अब इन्हें खुद अपने आय के साधन जुटाने होंगे। सरकार के पास इनके लिए ग्रांट देने के लिए पैसा नहीं है। दूसरी ओर, सरकार ने इन्हें मर्ज करने का भी सुझाव दिया है। हिमाचल प्रदेश में सबसे ज्यादा हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड लिमिटेड का घाटा है। यह घाटा 3246.97 करोड़ रुपये से अधिक है। इसके अतिरिक्त राज्य पथ परिवहन निगम का घाटा दो हजार करोड़ तक पहुंचने वाला है। बिजली बोर्ड ने हिमाचल के लोगों के लिए 125 यूनिट तक बिजली फ्री की है। वहीं परिवहन निगम की ओर से भी हिमाचल में 28 कैटेगरी के यात्रियों को निशुल्क परिवहन सेवाएं दी जा रही हैं। हिमाचल में इस समय निगम-बोर्ड 7 हजार करोड़ रुपये के घाटे में चल रहे हैं।
किस निगम-बोर्ड को कितना घाटा
हिमाचल प्रदेश में 39 निगम-बोर्ड हैं। इसके अलावा 8 शिक्षण संस्थान हैं। स्कूल शिक्षा बोर्ड और यूनिवर्सिटी इसमें शामिल हैं। प्रदेश बिजली बोर्ड लिमिटेड को 3246.97 करोड़, राज्य पथ परिवहन निगम को 1966.13 करोड़, वित्त निगम को 180.97 करोड़, वन निगम को 110.42 करोड़, एचपीएमसी को 91.20 करोड़, एग्रो इंडस्ट्रीज निगम को 10.86 करोड़, पॉवर ट्रांसमिशन निगम को 105.13 करोड़, पर्यटन विकास निगम को 36.28 करोड़, हस्तशिल्प एवं हथकरघा निगम को 12.42 करोड़ समेत अन्य निगम-बोर्ड भी घाटे में चल रहे हैं। प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार की ओर से दी गई वित्तीय प्रस्तुति में उन्होंने कहा कि निगम-बोर्डों को मर्ज करने की जरूरत है। ग्रांट बंद करने का भी सुझाव दिया।