हिमाचल की छह समेत देश की 61 छावनियों के सिविल क्षेत्र को स्थानीय निकायों में मिलने की अंतिम प्रक्रिया शुरू हो गई है। लोकसभा चुनाव के चलते सिविल क्षेत्रों को छावनियों से बाहर करने की प्रक्रिया पहले रुक गई थी। सिविल क्षेत्र स्थानीय निकाय में मिलने के बाद लोग सरकार की सारी सुविधाओं को लाभ उठा ले सकेंगे। वहीं, मकान के नक्शों समेत बिजली-पानी के कनेक्शन लेने में भी आसानी होगी।
देश के रक्षा सचिव ने 25 जून को सिविल क्षेत्रों को बाहर करने के संबंध में बैठक ली थी। इसके बाद उपमहानिदेशक (कैंट) अरविंद कुमार द्ववेदी ने 27 जून को पत्र लिखकर सभी प्रधान निदेशक के तहत डिफेंस इस्टेट को दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने सिविल क्षेत्रों को प्रदेश के नगर निकायों में मिलाने के लिए सभी औपचारिकताएं जल्द से जल्द पूरी करने को कहा है। बता दें कि छावनियों से सिविल क्षेत्रों को बाहर करने की मांग लंबे समय से चल रही है।
इस प्रक्रिया से छावनी में रह रहे लाखों लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जाग गई है। अब देश की 61 छावनियों के सिविल क्षेत्र को बाहर निकाले के लिए अब अंतिम प्रक्रिया समझा जा रहा है। ऑल इंडिया कैंट वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव जितेंद्र सुराना और हिमाचल कैंट एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने रक्षा मंत्रालय के ताजा आदेशों का स्वागत किया है।
कहा कि अब रक्षा मंत्रालय सिविल क्षेत्रों को नगर निकाय में मिलाने का आदेश दे सकता है। प्रदेश में सोलन जिले की डगशाई, सुबाथू, कसौली, शिमला की जतोग और चंबा जिले की डलहौजी व बकलोह छावनी से सिविल क्षेत्र को बाहर करने की कवायद चल रही है। आर्मी एरिया में होने के कारण लोगों को मकान, बिजली-पानी कनेक्शन लेने को लेकर कई दिक्कतें आ रही हैं, लेकिन बाहर होने के बाद लोग सरकार की तमाम सुविधाएं मिल सकेंगे।