हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने विभागों के आग्रह पर दी स्वीकृति, लंबित कार्यों को अब किया जा सकेगा ब्योरा
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संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला ने मेरु और पीएम-उषा योजनाओं (प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा-प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान) के तहत होने वाले कार्यों की समय सीमा बढ़ा दी है। कुलपति प्रो. महावीर सिंह की स्वीकृति के बाद अब इन योजनाओं के तहत प्रस्तावित गतिविधियां 31 मार्च 2026 तक चलेंगी।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह निर्णय विभिन्न विभागों, संस्थानों और केंद्रों से प्राप्त अनुरोधों के आधार पर लिया है, जिनमें परीक्षाओं और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के कारण समय की कमी का हवाला दिया था। प्रशासन की ओर से जारी सूचना के अनुसार सभी संबंधित विभागों, संस्थानों और केंद्रों को निर्देश दिए हैं कि वह समयावधि के भीतर अपनी योजनाबद्ध गतिविधियों को पूरा करें। इसके साथ निर्देश दिए हैं कि जिन इकाइयों ने अभी तक अपनी प्रस्तावित गतिविधियों का ब्योरा नहीं दिया है वो रिपोर्ट अवश्य प्रस्तुत करें। गतिविधियों के सफल आयोजन के बाद एक विस्तृत प्रतिवेदन भी योजना अनुभाग में जमा करना होगा।
यह रिपोर्ट हार्ड कॉपी के रूप में या ईमेल के माध्यम से भेजी जा सकती है। प्रशासन ने यह व्यवस्था पारदर्शिता और योजनाओं की प्रभावी निगरानी के उद्देश्य से लागू की है। वित्तीय पक्ष को लेकर भी स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। सभी विभागों और केंद्रों को गतिविधियों पर किए व्यय से संबंधित ऑडिट उपयोगिता प्रमाण पत्र समय पर वित्त शाखा अथवा बजट अनुभाग में जमा करने होंगे। इसकी सूचना संबंधित कार्यालय को देना आवश्यक है। विश्वविद्यालय प्रबंधन का कहना है कि समय सीमा बढ़ाने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शैक्षणिक गुणवत्ता से समझौता किए बिना योजनाओं के लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से पूरा किया जाएगा। इससे विभागों को गतिविधियों की बेहतर योजना बनाने और उन्हें सुचारू रूप से संपन्न करने में सुविधा मिलेगी।