प्रशासन ने कहा-इसे लागू करना जरूरी, केंद्र और प्रदेश सरकार के हैं निर्देश
पार्षदों के विरोध के बाद सदन ने एक माह के लिए टाला प्रस्ताव
व्यापार मंडलों से बैठक कर अगले महीने फिर सदन में होगी चर्चा
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी के हजारों कारोबारियों के लिए नगर निगम से ट्रेड लाइसेंस लेने की शर्त फिलहाल लागू नहीं होगी। नगर निगम पार्षदों के दबाव के चलते इस प्रस्ताव को एक माह के लिए टाल दिया है।
अब नवंबर में होने वाली नगर निगम की मासिक बैठक में इस पर दोबारा चर्चा होगी। महापौर सुरेंद्र चौहान की अध्यक्षता में मंगलवार को बचत भवन में हुई नगर निगम की मासिक बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी के लिए रखा गया। जैसे ही प्रस्ताव पटल पर रखा कि पार्षदों ने इस पर विरोध जता दिया। मनोनीत पार्षद अश्वनी सूद, चमन प्रकाश समेत कई पार्षदों ने इसे लागू न करने की बात कही। अश्वनी सूद ने दावा किया कि पहले भी निगम ने इसे लागू किया था लेकिन तब हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगा दी थी। इस पर निगम आयुक्त भूपेंद्र अत्री ने कहा कि उनके ध्यान में ऐसा कोई आदेश नहीं है। फिर भी इसे चेक करेंगे। कहा कि यह शर्त लागू करना अनिवार्य है। केंद्र और राज्य सरकार से निगम को इसे लागू करने के निर्देश मिले हैं। निगम में भी पहले यह शर्त लागू थी और 900 से ज्यादा कारोबारियों ने यह लाइसेंस लिया है। हालांकि पहले इस बारे में नियम नहीं थे। अब निगम ने इसके नियम बना दिए हैं। महापौर ने कहा कि इस शर्त को कारोबारियों पर नहीं थोपा जाएगा। पहले व्यापार मंडलों के प्रतिनिधियों से इस पर चर्चा करेंगे। इसके बाद अगले सदन में इसे चर्चा के लिए लाया जाएगा।
आम जनता से मांगें आपत्तियां-सुझाव
सदन ने प्रस्ताव तो एक माह के लिए टाल दिया लेकिन इसके लिए बनाए नियमों पर कारोबारियों की आपत्तियां और सुझाव लिए जाएंगे। निगम जल्द अपनी वेबसाइट पर इसके नियम आम जनता के लिए रखेगा। लोग इस पर अपने सुझाव दर्ज करवा सकते हैं।
यह हैं नए नियम
नगर निगम से अब हर कारोबारी, होटल मालिक, तहबाजारी आदि को ट्रेड लाइसेंस लेना होगा। लाइसेंस फीस दुकान के आकार, वार्ड और कारोबार की श्रेणी के अनुसार तय होगी। अस्थायी रूप से दुकानें लगाने वाले दुकानदारों को भी लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। पहले एक ही श्रेणी में हर तरह के कारोबार का लाइसेंस मिलता था। अब इसकी श्रेणियां 150 से ज्यादा कर दी हैं।