प्रदेश सरकार सूबे में तीन रोप-वे के निर्माण को चौथी बार टेंडर करवा रही है। पर्यटन विभाग ने रोप-वे निर्माण के इच्छुक निवेशकों से पहली मार्च तक आवेदन आमंत्रित किए हैं। 12 फरवरी को नई दिल्ली स्थित हिमाचल भवन में प्री बिड बैठक भी बुलाई गई है।
भागसूनाग से त्रियुंड, टोबा से नयनादेवी और शाहतलाई से दियोटसिद्ध तक रोप-वे निर्माण प्रस्तावित है। बीते साल 13 अक्तूबर, 16 नवंबर और 16 जनवरी को किसी भी निवेशक ने टेंडर लेने को आवेदन नहीं किया था। अब सरकार ने प्रदेश इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड के माध्यम से चौथी बार टेंडर आमंत्रित किए हैं।
सरकार ने बीते साल पांच रोप-वे के निर्माण की योजना बनाई थी। दो रोप-वे प्रोजेक्ट का काम सरकार ने आवंटित कर दिया है। इनमें पलचान से रोहतांग और धर्मशाला रोप-वे प्रोजेक्ट शामिल हैं। शेष तीन रोप-वे प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ पा रहे हैं। इनका निर्माण पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) में होना है।
निवेशक के पास 40 साल तक रोप-वे रहेगा। इसके बाद रोप-वे सरकार के अधीन आएगा। इनके निर्माण से हिमाचल में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। वादियों से होकर गुजरने वाले रोप-वे पर सफर करने का अलग ही एहसास होगा। इसके अलावा प्रदेश की सर्पीली सड़कों की चढ़ाई-उतराई से होने वाली थकान से भी लोगों को निजात मिलेगी।
चंद मिनटों में रोप-वे के माध्यम से सफर हो सकेगा। अनछुए पर्यटक स्थलों से भी लोग रूबरू हो सकेंगे। सूत्रों के मुताबिक निर्माण लागत अधिक होने की आशंका के चलते निवेशक टेंडर प्रक्रिया में भाग नहीं ले रहे हैं।
रोप-वे=============जिला======अनुमानित दूरी
भागसूनाग से त्रियुंड======कांगड़ा======3.06 किलोमीटर
टोबा से नयनादेवी=======बिलासपुर====2.40 किलोमीटर
शाहतलाई से दियोटसिद्ध==हमीरपुर=====1.85 किलोमीटर