हिमाचल सरकार ने तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को कार्यकारी मजिस्ट्रेट की शक्तियां दी हैं। हालांकि, उनके लिए दंड प्रक्रिया संहिता के तहत कार्यकारी मजिस्ट्रेट की शक्तियां देने के लिए विभागीय परीक्षा और शैक्षणिक योग्यता के अनुभव का पेंच भी लगाया गया है। मुख्य सचिव पी. मित्रा ने इस संबंध में अधिसूचना को 11 मार्च 2011 की विभागीय अधिसूचना को सुपरसीड कर जारी किया है।
ये शक्तियां इनके संबंधित कार्यक्षेत्रों में ही लागू रहेंगी। हालांकि, दंड प्रक्रिया संहिता के कार्य सब डिविजनल मजिस्ट्रेट्स की ओर से ही परफार्म किए जाएंगे, जो या तो आईएएस अधिकारी हैं या एचपीएस अफसर हैं। वे इस तरह के मामले ऐसे कार्यकारी मजिस्ट्रेट को ट्रांसफर नहीं करेंगे, यदि कोई ठोस कारण नहीं हो। जब दंड प्रक्रिया संहिता के मामले ट्रांसफर करने की जरूरत होगी तो वे ऐसे कार्यकारी मजिस्ट्रेट को ट्रांसफर किए जाएंगे, जिन्होंने क्रिमिनल लॉ और प्रोसीजर में विभागीय परीक्षा को पास किया है, जिसे कि उनके लिए बताए गए प्रोसीजर के अनुसार लिया गया है।
उनके पास उपयुक्त शैक्षणिक योग्यता भी होनी चाहिए। यह डायरेक्ट रिक्रूट के मामले में ग्रेजुएट और प्रमोटी के मामले में दसवीं होनी चाहिए। साथ ही इनके पास केस फाइल को ट्रांसफर करने का भी वाजिब कारण होना चाहिए। ऐसे एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की ओर से हाई कोर्ट में रिटर्न भी फाइल होनी चाहिए।