अध्यापकों का समायोजन होगा, तबादले भी
बंद या मर्ज किए गए स्कूलों में कार्यरत अध्यापकों को पद सहित नजदीक के स्कूलों या अधिक विद्यार्थी संख्या वाले अन्य स्कूलों में सचिव शिक्षा के अनुमोदन के बाद स्थानांतरित किया जाएगा। इसके बाद भी अगर शिक्षक उपलब्ध होंगे तो उनका एक पूल निदेशक स्तर पर बनाया जाएगा व उन्हें अवश्यकता अनुसार स्कूलों में स्थानांतरित किया जाएगा । कई पाठशालाओं में बच्चों की संख्या कम हो रही है तथा अध्यापकों की संख्या या समान है या ज्यादा हो रही है। ऐसे में बच्चों की संख्या के अनुपात के अनुसार अध्यापकों का भी समायोजन किया जाएगा । यह प्रक्रिया वर्तमान में लागू अधिसूचना के अनरूप प्रशासनिक विभाग की ओर से पूरी की जाएगी।
मुख्याध्यापक, प्रिंसिपल भी पढ़ाएंगे
प्रशासनिक पदों पर विद्यालयों में कार्यरत मुख्याध्यापक, प्रिंसिपल अपने प्रशासनिक कार्य के अतिरिक्त कम से कम एक कक्षा में अपने विषय को पढ़ाएंगे। इसके अतिरिक्त, प्राथमिक स्कूलों के केंद्रीय मुख्य शिक्षक तथा मुख्य शिक्षक भी जेबीटी के समकक्ष ही अध्यापन कार्य करेंगे। अध्यापन संबंधी कार्य को इनकी एसीआर में भी अंकित किया जाएगा।
बच्चों को शारीरिक व्यायाम करना अनिवार्य
प्रदेश के सभी स्कूलों में सुबह प्रार्थना सभा में बच्चों के लिए शारीरिक व्यायाम करना अनिवार्य होगा, जिसके लिए कम से कम 15 मिनट का समय निर्धारित होगा तथा शारीरिक शिक्षक ही यह जिम्मेदारी निभाएंगे। शारीरिक शिक्षक जिस भी स्कूल, स्कूल कलस्टर में तैनात हैं, वे वहां सभी कक्षाओं तथा कलस्टर में शामिल सभी स्कूलों के बच्चों को शारीरिक व्यायाम /खेल गतिविधियां करवाएंगे। जिन स्कूलों में कोई शारीरिक शिक्षक नहीं हैं, वहां अन्य कोई अन्य अध्यापक यह कार्य करवाएगा। इसके अतिरिक्त सुबह की प्रार्थना सभा में राष्ट्रगान भी अवश्य गाया जाएगा। प्रार्थना सभा सर्वधर्म समभाव को बढ़ाने वाली होगी। साथ ही ऐ मालिक तेरे बंदे हम व इतनी शक्ति हमे देना दात्ता...... को भी प्रार्थना के रूप में शामिल किया जाएगा। प्रत्येक स्कूल में प्रतिदिन खेल, शारीरिक प्रशिक्षण का एक पीरियड जरूर होगा। स्कूलों में सीपीआर तथा प्राथमिक चिकित्सा की ट्रेनिंग दी जाएगी।
आवासीय विद्यालय की संभावना तलाशी जाएगी
जिला लाहौल एवं स्पीति में 121 और जिला किन्नौर में 29 ऐसे प्राथमिक स्कूल हैं, जिनमें बच्चों की संख्या पांच या पांच से कम है। ऐसी स्थिति में आवासीय विद्यालय की संभावना को तलाशा जाएगा। इसे पायलट के तौर पर लाहौल एवं स्पीति तथा किन्नौर जिले मे शुरू किया जाएगा । शिक्षा विभाग की ओर से कुछ स्थानों पर लड़कों और लड़कियों की पढ़ाई के लिए अलग-अलग स्कूलों को चलाया जा रहा है। इन स्कूलों में भी बच्चों की संख्या कम हो रही है। ऐसे में जहां ऐसा करना संभव हो, इन स्कूलों को एक ही स्कूल में मर्ज करके सह शिक्षा स्कूल के रूप में चलाया जाएगा ताकि बच्चों को अच्छी शिक्षा प्रदान की जा सके।
मानक संचालन प्रक्रिया से लागू होंगे सभी फैसले
साथ ही उपलब्ध संसाधनों का उचित उपयोग किया जा सके। ऐसे मामलों का मामलावार निर्णय सचिव शिक्षा के स्तर पर लिया जाएगा। शिक्षा सचिव ने प्रारंभिक शिक्षा निदेशक को इन निर्णयों की अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए आगामी आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है। साथ ही इन निर्णयों को लागू करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया भी तदानुसार तैयार करना सुनिश्चित करने को कहा है।