हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ ने कैबिनेट में पूर्व सैनिकों को वित्तीय लाभ देने के फैसले का विरोध किया है। जयराम सरकार के खिलाफ मुखर शिक्षक संघ ने पूर्व सैनिकों को दिए जाने वाले वित्तीय लाभ को अन्य कर्मचारियों के वित्तीय लाभ पर चल रही कैंची के मद्देनजर तर्कसंगत नहीं माना है।
संघ के राज्य अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान, संरक्षक अरुण गुलेरिया, अजित चौहान, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सरोज मेहता, प्रदेश वित्त सचिव मुकेश शर्मा और मुख्य प्रेस सचिव कैलाश ठाकुर ने कहा है कि सर्वोच्च न्यायालय पूर्व सैनिकों के दोबारा प्रदेश में नौकरी प्राप्त करने पर उनकी सैनिक सेवा को वर्तमान पद पर वरिष्ठता के लिए नकार चुका है।
सरकार को सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का सम्मान करना चाहिए। यदि सरकार पूर्व सैनिकों को वरिष्ठता न देते हुए केवल उनकी सैनिक सेवा के लिए वार्षिक वेतन वृद्धियां देने जा रही है तो प्रदेश सरकार को अन्य लाखों कर्मचारियों के उन वित्तीय लाभों को भी पूरा कर देना चाहिए जिन पर पूर्व कांग्रेस सरकार ने कैंची चला रखी थी।
संघ ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि प्रदेश के कर्मचारियों को 4-9-14 वेतन वृद्धि मूल रूप में लागू कर दी जाए। टीजीटी और पीजीटी शिक्षकों को 2012 से बंद इनिशियल स्टार्ट दिया जाए। नई ग्रेड पे के लिए दो वर्ष की शर्त खत्म की जाए, अनुबंध से नियमित अध्यापकों और कर्मचारियों को अनुबंध सेवाकाल का पद वरिष्ठता सहित वित्तीय लाभ दिया जाए, स्कूल प्रधानाचार्य पद पर नियमित पदोन्नति की जाए।