शिमला में ऐसे कई सरकारी स्कूल हैं, जहां नेताओं और अफसरों की पत्नियां या रिश्तेदार सेवारत हैं। शिमला से सटे दूसरे विधानसभा क्षेत्रों के स्कूलों में भी अफसरों और नेताओं के करीबी शिक्षकों ने ही कब्जा जमाया हुआ है।
प्रदेश में चाहे सरकार किसी भी पार्टी की रही हो, इन प्रभावशाली शिक्षकों का कोई बाल भी बांका नहीं कर सका है। तीन साल का सेवाकाल समाप्त होते ही अधिकांश प्रभावशाली शिक्षक आसपास के स्कूलों में ही एडजस्टमेंट करवाते आए हैं।
प्रदेश में शिक्षकों का सबसे बड़ा कैडर है। मुख्य क्षेत्रों में टिके शिक्षकों को लेकर प्रदेश के दूरदराज और अन्य क्षेत्रों में सेवारत शिक्षकों में भारी रोष रहता है। प्रदेश में शिक्षकों का सबसे बड़ा कैडर है।
ऐसे में प्रदेश के हजारों शिक्षकों को कुछ शिक्षकों के लिए नाराज करने का सरकार जोखिम नहीं उठाना चाहती है। इसके चलते ही शिक्षा विभाग ने शिमला शहर, शिमला ग्रामीण और कसुम्पटी में कई सालों से टिके शिक्षकों को अन्य क्षेत्रों में भेजने की तैयारी शुरू कर दी है।
शिमला। शिक्षा विभाग में तबादलों को आनलाइन पोर्टल के माध्यम से करने का प्रस्ताव बनना शुरू हो गया है। शिक्षा विभाग के अधिकारी इन दिनों हरियाणा के मॉडल को स्टडी कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि अगले सप्ताह तक प्रदेश सरकार को ट्रांसफर पोर्टल को प्रस्ताव तैयार कर भेज दिया जाएगा।