टंकी फुल करवाने के चुकाने पड़ रहे चार से पांच सौ रुपये अतिरिक्त
विज्ञापन
सीजन में किराया बढ़ाने का जोखिम नहीं ले रहे टैक्सी कारोबारी अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। पेट्रोल और डीजल के दाम एक सप्ताह में चार बार बढ़ने से राजधानी में टैक्सी कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। टैक्सी चालकों का कहना है कि छह से सात रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के कारण अब टंकी फुल करवाने में चार से पांच सौ रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ रहे हैं। जिले में करीब दस हजार टैक्सियां चलती हैं।
पहले से महंगाई की मार झेल रहे टैक्सी कारोबारियों के लिए रूटीन खर्च पूरे करना और परिवार का पालन-पोषण करना मुश्किल होता जा रहा है। पर्यटन सीजन शुरू होने से पहले तेल के दाम बढ़ने से उनकी कमाई पर भी असर पड़ रहा है। सीजन के दौरान टैक्सी यूनियनें स्वयं किराया बढ़ाने का जोखिम लेने से कतरा रही हैं। टैक्सी चालकों की सरकार से मांग है कि तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के मद्देनजर या तो टैक्सी किराये बढ़ाए जाएं या फिर टैक्स में छूट देकर राहत दी जाए। कारोबारियों का कहना है कि मौजूदा स्थिति में गुजारा करना मुश्किल हो गया है और कमाई पर भी असर पड़ रहा है।
विज्ञापन
पेट्रोल-डीजल की सप्लाई न रुके पर्यटन सीजन शुरू हो चुका है। पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े हैं, लेकिन सरकार ने अब तक कोई राहत नहीं दी है। सरकार को चाहिए कि सीजन के दौरान हर जगह पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता सुनिश्चित करें क्योंकि हमारी रोजी-रोटी तेल पर ही निर्भर है। यदि तेल की सप्लाई रुकी तो न केवल टैक्सी कारोबार बल्कि पूरा पर्यटन उद्योग प्रभावित होगा। -राजेंद्र ठाकुर, चेयरमैन, ऑल कमर्शियल व्हीकल ज्वाइंट एक्शन कमेटी
अब नहीं हो रहा गुजारा, कमाई भी कम राजधानी शिमला में पहले से ही अधिक प्रतिस्पर्धा है। बाहरी राज्यों से आने वाले पर्यटक अपने निजी वाहनों और वोल्वो बसों से यात्रा कर रहे हैं, जिससे कारोबार प्रभावित हुआ है। अब तेल के दामों में एक साथ इतनी वृद्धि होने से कमाई और घट गई है। अपने और परिवार के खर्च पूरे करना मुश्किल हो रहा है। किराया बढ़ाना मजबूरी बन गई है, लेकिन सीजन शुरू होने के बाद यह जोखिम नहीं लिया जा सकता। -पवन ठाकुर, सचिव, थ्री स्टार टैक्सी ऑपरेटर यूनियन, ओल्ड बस स्टैंड
पर्यटकों पर निर्भर करता है कारोबार टैक्सी का कारोबार मुख्य रूप से पर्यटकों और स्थानीय लोगों पर निर्भर करता है। तेल के दाम बढ़ने से अब ईंधन का खर्च उठाना मुश्किल हो रहा है। सरकार को टैक्सी की निर्धारित दरों में भी बढ़ोतरी करनी चाहिए, ताकि चालक अपने बढ़े हुए खर्च पूरे कर सकें और रोजी-रोटी चला सकें।
महंगाई के दौर में बढ़ीं मुश्किलें पहले से बढ़ती महंगाई के कारण गुजारा मुश्किल हो रहा था। अब तेल के दाम बढ़ने से टैक्सी की कमाई से घर चलाना और भी कठिन हो गया है। बच्चों की फीस, घर के रूटीन खर्च और तेल का खर्च पूरा करने में कमाई कम पड़ रही है। सरकार को टैक्सी कारोबारियों के हित में सोचते हुए किराए बढ़ाने पर विचार करना चाहिए। -नरेश ठाकुर, अध्यक्ष, एयरपोर्ट यूनियन