राजधानी शिमला से जुब्बल एयरपोर्ट तक दिल्ली की फ्लाइट के बराबर टैक्सी भाड़ा वसूला जा रहा है। प्रदेश में हवाई सेवाओं को विस्तार देकर सैलानियों की संख्या व गुणवत्ता बढ़ाने के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के दावों की सरकारी तंत्र और निजी टैक्सी ऑपरेटर हवा निकाल रहे हैं। परिवहन निगम मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षा को दरकिनार कर जुब्बल एयरपोर्ट से शहर के लिए एक सरकारी बस तक नहीं चला पा रहा।
वहीं, सरकारी तंत्र की इस उदासीनता का टैक्सी ऑपरेटर जमकर फायदा उठा रहे हैं। शिमला से दिल्ली के बीच केंद्र सरकार ने उड़ान योजना के तहत दो हजार से कम कीमत में हवाई सफर की सुविधा शुरू की। 27 अप्रैल 2017 से एक फ्लाइट दिल्ली से शिमला और शिमला से दिल्ली के बीच उड़ान भरने लगी। पिछले एक साल के दौरान इस उड़ान के जरिये करीब दस हजार यात्रियों ने शिमला एयरपोर्ट से आवागमन किया।
खास बात यह है कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने दावा किया कि न सिर्फ फ्लाइटों की संख्या बढ़ाई जाएगी बल्कि हवाई सेवा को प्रदेश के अन्य हिस्सों में विस्तार भी दिया जाएगा। लेकिन जिस राजधानी शिमला में उड़ान योजना के तहत फ्लाइट से यात्री आ रहे हैं, उनसे शिमला पहुंचते ही जमकर लूट की जा रही है।
सस्ती सेवा वाली योजना के जरिये जहां दिल्ली से शिमला के बीच की यात्रा के लिए यात्रियों को दो हजार से कम रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। वहीं, शिमला शहर से एयरपोर्ट या एयरपोर्ट से शिमला शहर आने वाले यात्रियों को पंद्रह सौ से दो हजार देने पड़ रहे हैं।
खास बात यह है कि एयरपोर्ट के अधिकारियों से लेकर यात्री तक सरकार से परिवहन बस संचालित करने की मांग कर चुके हैं। लेकिन सरकार अब तक न तो बस संचालन कर पाई है और न ही किराये पर नियंत्रण कर सकी है।