प्रदेश विधानसभा में वन मंत्री राकेश पठानिया ने कहा कि मनरेगा सड़कों की मरम्मत में वन विभाग फ्रेंडली तरीके से पेश आएगा। एफआरए मंजूरी के मामलों के लंबित होने पर आए सवाल के जवाब में वन मंत्री राकेश पठानिया ने कहा कि यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है। शुक्रवार को नाचन के भाजपा विधायक विनोद कुमार ने अनुपूरक सवाल किया कि मनरेगा के तहत बहुत सी सड़कें वन क्षेत्र में बनी हैं, अगर रिपेयर करने की बात आती है तो वहां फॉरेस्ट गार्ड, बीओ खडे़ हो जाते हैं।
इस पर वन मंत्री ने कहा कि एफआरए के मामलों में वन विभाग फ्रेंडली तरीके से पेश आएगा। भटियात के भाजपा विधायक विक्रम जरयाल ने एफआरए अनुमतियों और ग्रीन फेलिंग पर सवाल किया। वन मंत्री राकेश पठानिया बोले कि यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है। सुप्रीम कोर्ट में इस केस को लड़ा जा रहा है। दो साल में 120 अनुमतियां ली जा चुकी हैं। 150 के अनुमतियां कोर्ट में लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट में यह मामला ठीक से रखा जा रहा है।
सदन में शुक्रवार को बताया गया कि प्रदेश के बागवानों को एंटीहेल नेट पर उपदान देने के लिए सरकार ने नीति नहीं बदली है। सरकार बागवानों को एंटीहेल नेट अस्सी फीसदी उपदान पर उपलब्ध करा रही है। माकपा विधायक राकेश सिंघा ने शुक्रवार को बागवानों से जुड़े एंटीहेल नेट पर दिए जा रहे उपदान की नीति पर सदन में सवाल पूछा। सिंघा ने सरकार से जानना चाहा कि क्या सरकार नेट पर उपदान देने की नीति बदलने जा रही है।
इस पर सरकार ने लिखित जवाब में अवगत कराया कि एकीकृत बागवानी विकास मिशन और राज्य प्लान स्कीम के तहत बागवानों को योजना के तहत एंटीहेल नेट लगाने के लिए वित्तीय मदद दी जाती है। इन नेटों की आपूर्ति के लिए फर्मों को सूचीबद्ध किया है। अवगत कराया गया कि विभाग ने वर्ष 2021 के लिए विभिन्न फर्मों को सूचीबद्ध किया है। एंटीहेल नेट बागवानों को 10 से 15 रुपये वर्ग मीटर के हिसाब से उपलब्ध कराया जा रहा है। नेट की गुणवत्ता के आधार पर रेट तय हैं।