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राजपथ पर दिखी हिमाचल की 1000 साल पुरानी विरासत की झांकी

Sat, 27 Jan 2018 10:32 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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69वें गणतंत्र दिवस के मौके पर राजपथ पर  हिमाचल की 1000 साल पुरानी ‌विरासत की झलक दिखी। दिल्ली के राजपथ पर लाहौल-स्पीति के 1000 साल पुराने कीह मठ की झांकी प्रदर्शित की गई।  

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गणतंत्र दिवस में लगातार दूसरी बार हिमाचल की झांकी देखने को मिली है। राजपथ पर कीह गोंपा की इस झांकी को आसियान देशों के प्रमुखों समेत पूरी दुनिया ने देखा। इससे लाहौल-स्पीति समेत पूरे हिमाचल में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को पंख लग सकते हैं। 

जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति के काजा के पास स्थित कीह गोंपा बौद्ध धर्म के गेलुग संप्रदाय से संबंधित है। यह गोंपा तिब्बत और भारत की सदियों पुरानी सांस्कृतिक व धार्मिक विरासत को संजोए हुए है। समुद्रतल से करीब 4500 मीटर की ऊंचाई यह मठ एक टीले पर है। 
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यहां करीब 300 भिक्षु-भिक्षुणियां बौद्ध धर्म की शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। यह मठ विदेशी शोधार्थियों का भी केंद्र है। महान अनुवादक रिंचेन जंगपो के अवतारी लामा इस मठ के मठाधीश रहे हैं। वर्तमान में मठाधीश टीके लोचेन टुलकू को रिंचेन जंगपो का 19वां अवतारी लामा माना जाता है। 

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ये मठ का इतिहास, इंदिरा गांधी आ चुकीं हैं दो बार  

कीह गोंपा को वर्ष 1008 के आसपास एक बौद्ध लामा धोमतन ने बनवाया था। कीह मठ के पहले प्रमुख लामा रिंचेन्न जंगपो हुए। उसके बाद उनके अवतार लेने वाले रिंपोचे इस गद्दी को संभालते आ रहे हैं। तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी दो बार इस गोंपा के दर्शन कर चुकी हैं।

कीह गोंपा के प्रमुख अवतारी टीके लोचेन टुलकु ने बताया कि साल 2000 में कीह मठ ने अपना मिलेनियम (1000 साल) उत्सव मनाया। महामहिम दलाईलामा भी यहां दो बार आ चुके हैं।

20 बौद्ध भिक्षु भी होंगे झांकी में शामिल
झांकी के साथ कीह गोंपा के 20 बौद्ध भिक्षु भी शामिल होंगे। महिला और पुरुष भिक्षु बौद्ध धर्म के पूजा-पाठ और संस्कृति का प्रदर्शन करेंगे। वे लामा और पारंपरिक परिधानों में होंगे। इसके लिए कीह गोंपा में पूरी तैयारियां हो चुकी हैं। 
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