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जयराम सरकार के सामने पहाड़ जैसी चुनौतियां, पार पाना आसान नहीं

Sat, 27 Jan 2018 10:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
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जयराम सरकार ने सत्ता में आने के सौ दिनों के भीतर अगले टारगेट तय कर लेने का फैसला लिया है, मगर इस अल्पावधि में सरकार को अपनी कथनी को करनी में बदलने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी। 

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जिस कानून-व्यवस्था की लचर हालत पर सवाल उठाकर भाजपा ने सत्ता हासिल की, उसे पटरी पर लाना राज्य सरकार के समक्ष बड़ी चुनौती होगी। राज्य सरकार को लाखों युवाओं को रोजगार दिलाना होगा। 

हिमाचल में नए उद्योग और महिलाओं को मुख्यधारा में स्थापित करने के लक्ष्य भी आसान नहीं हैं। हिमाचल प्रदेश वर्तमान में करीब 45 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के कर्जे में डूबा हुआ है। विकास योजनाओं को चलाए रखने को पर्याप्त पैसा नहीं है। 

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सरकार के समक्ष सबसे बड़ी चुनौति

राज्य सरकार के अधिकारियों और कर्मचारियों को वेतन देने के लिए कर्ज लेना पड़ रहा है। सरकार में आए महीना गुजर जाने के बाद भी मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर पुरानी वीरभद्र सरकार पर कर्ज बढ़ाने का दोष मढ़ रहे हैं।

लेकिन कर्ज कै से उतरेगा और प्रदेश की आमदनी कै से बढ़ेगी इस बारे में अभी तक सरकार की तरफ से कोई फार्मूला सामने नहीं आया है। जब तक हिमाचल सरकार के आय के नए स्रोत तैयार नहीं हो जाते और पुरानी देनदारियां चुका नहीं दी जातीं, तब तक कै से प्रदेश की आर्थिकी पटरी पर आएगी।

इस सवाल के सामने सरकार की मुद्रा ज्यादा सहज नजर नहीं आ रही। कानून-व्यवस्था में सुधार लाने के मामले में भी सरकार के सामने चुनौतियां जस की तस हैं। हजारों की संख्या में नए पद सृजित करने और इतनी ही रिक्तियाें को भरने की व्यवस्था कब और कैसे होगी, सवाल अनसुलझे हैं।

पुलिस को वीआईपी कल्चर से मुक्त कर कानून-व्यवस्था के काम में ही लगाना होगा। निजी क्षेत्र में भी रोजगार के अवसर तलाशने होंगे। इस सबके लिए धन की जरूरत रहेगी। चूंकि केंद्र में भाजपा की सरकार है,

इसलिए माना जा सकता है कि हिमाचल प्रदेश सरकार के पास केंद्र की बैसाखी तो होगी ही, मगर इसके आसरे भी प्रदेश की अर्थव्यवस्था कितनी दुरुस्त होगी यह भी एक बड़ा प्रश्न है। 
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दृष्टिपत्र पर शुरुआती कदमों का इंतजार

विजन डॉक्यूमेंट मेें भाजपा ने सत्ता में आने से पहले कई बातें कीं। इसमें मुख्यमंत्री कार्यालय में होशियार हेल्पलाइन को चौबीसों घंटों चलाने की घोषणा, गुड़िया हेल्पलाइन शुरू करने जैसे प्रमुख काम ही शुरू नहीं हो पाए हैं। हर घर, हर नल में स्वच्छ पेयजल पहुंचाने की बातें भी कागजों में ही हैं।

सड़कों से हिमाचल के सभी गांव जोड़ना भी कोई छोटा काम नहीं है। विजन डॉक्यूमेेंट में की गई घोषणा के तहत वर्ष 2022 तक हिमाचल के किसानों की आय दोगुना की जाएगी। रबी की फसल सूखे की चपेट में है। ये वायदा कैसे पूरा किया जाएगा? इस पर भी अभी तक कोई योजना नहीं बनी है।

सरकार की ओर से अधिगृहित की गई कृषि भूमि के मुआवजे के भुगतान को दोगुना से बढ़ाकर चौगुना किए जाने की भी किसान बाट जोह रहे हैं। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नए गांवों में होम स्टे खोलने,

सभी मंदिरों को देवभूमि दर्शन सर्किट से जोड़ना, नि:शुल्क चार धाम यात्रा की सुविधा देने, मजदूरों की न्यूनतम दिहाड़ी को बढ़ाना और अपना घर योजना में 2022 तक हर गरीब के सिर पर छत बनाने जैसी योजनाएं लागू की जानी हैं। 
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