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हिमाचल में स्वाइन फ्लू का एक और केस

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हिमाचल में स्वाइन फ्लू का एक और केस सामने आया है। जिला कांगड़ा में स्वाइन फ्लू ने दस्तक दे दी है। डा. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कालेज टांडा में इलाज करवाने आई एक महिला में स्वाइन फ्लू होने की पुष्टि हुई है। अस्पताल प्रशासन ने इस बारे में स्वास्थ्य विभाग को सूचित कर दिया है। महिला में स्वाइन फ्लू की पुष्टि होते ही उसे टांडा अस्पताल के आइसोलेटेड वार्ड में दाखिल करवा दिया गया है।
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साथ ही महिला के इलाज में लगे स्टाफ के लिए मास्क समेत अन्य सचेतक सुविधाएं मुहैया करवा दी गई हैं। स्वाइन फ्लू से संबंधित महिला के टेस्ट टांडा में ही हो सकते थे, लेकिन अचानक मशीन के खराब होने से सैंपल शिमला भेजने पड़े। शिमला से आई रिपोर्ट में महिला में स्वाइन फ्लू के लक्षणों की पुष्टि हुई है।

अस्पताल प्रशासन सतर्क

लगभग चालीस वर्षीय यह महिला कांगड़ा के आलमपुर की रहने वाली है और कुछ दिन पहले ही अस्पताल में अपने स्वास्थ्य की जांच के लिए आई थी। महिला में स्वाइन फ्लू की रिपोर्ट पॉजीटिव आने के बाद अस्पताल प्रशासन सतर्क हो गया है। अस्पताल के एमएस डा. दिनेश सूद ने बताया कि कुछ दिन पहले महिला इलाज के लिए टांडा अस्पताल आई थी।

चिकित्सीय जांच के बाद डाक्टरों ने महिला में स्वाइन फ्लू के लक्षण पाए। ऐसे में महिला के रक्त के नमूने जांच के लिए भेजे गए। रविवार को इसकी रिपोर्ट आई और महिला में इन्हीं लक्षणों से संबंधित रिपोर्ट पॉजीटिव पाई गई। अब महिला का इलाज जारी है। डा. सूद ने बताया कि टांडा अस्पताल प्रशासन स्वाइन फ्लू से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।

मामले की जानकारी जिला प्रशासन के साथ जिला स्वास्थ्य महकमे को दे दी गई है। स्वाइन फ्लू के सैंपल से संबंधित हर सुविधा टांडा कालेज में है, लेकिन एक मशीन के अचानक खराब होने से ये सैंपल शिमला भेजे गए थे। जल्द ही मशीन ठीक करवाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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क्या हैं बीमारी के लक्षण

टीएमसी के एमएस डा. दिनेश सूद ने बताया कि स्वाइन फ्लू बीमारी होने पर मरीज को तेज बुखार आता है। शरीर पर लाल रंग के निशान हो जाते हैं। शरीर में गहरा घाव भी हो जाता है। इससे बीमारी की पहचान होती है और शक होने पर खून के सैंपल लेकर जांच होती है। इसके बाद स्वाइन फ्लू बीमारी की पहचान होती है।

बीते वर्ष चार मरीज आए थे स्वाइन फ्लू की चपेट में- बीते वर्ष टांडा मेडिकल कालेज में चार मरीजों में स्वाइन फ्लू के लक्षण पाए गए थे। खून की जांच के बाद इनमें भी बीमारी के लक्षण पाए गए थे। इलाज के बाद मरीज ठीक हो गए थे।
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