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स्वदेश दर्शन योजना: पौंग बांध और साथ के धरोहर गांवों में सर्वे शुरू, पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

Wed, 13 Dec 2023 12:37 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, धर्मशाला

सार

भारत सरकार की स्वदेश दर्शन योजना के तहत जिला कांगड़ा के चिन्हित स्थान पौंग बांध व इसके साथ लगते धरोहर गांवों में कवायद अब और तेज हो गई है। 
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पौंग बांध(फाइल) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सांस्कृतिक और ऐतिहासक विरासत की पहचान को फिर से स्थापित करने के अलावा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार की स्वदेश दर्शन योजना के तहत जिला कांगड़ा के चिन्हित स्थान पौंग बांध व इसके साथ लगते धरोहर गांवों में कवायद अब और तेज हो गई है। योजना को धरातल पर उतारने के लिए  अब यहां का सर्वे करवाया जा रहा है। इसके लिए गठित छह सदस्यों की टीम अब इस परियोजना को लेकर पूरे क्षेत्र में उन सभी संभावनाओं की तलाश में जुट गई है। इसके आधार पर इस क्षेत्र में यह परियोजना सही ढंग से धरातल पर उतर सके। इसके बाद इस परियोजना को लेकर बजट का प्रावधान कर इस योजना को आगे बढ़ाया जाएगा। इस सर्वे में मुख्य बिदुंओं में पौंग बांध, गुलेर, डाडासीबा, मसरूर क्षेत्र व संभावनाओं के अनुरूप गांवों और कस्बों में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अनछुए पहलुओं, इतिहास व संस्कृति लोक विद्याओं, परपंराओं को देश-विदेश से आने वाले लोगों को बताया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण स्तर पर युवाओं को रोजगार स्थापित करते के साथ पर्यटन से अर्थव्यस्था को बढ़ाना रहेगा।

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पौंग बांध में बर्ड वॉचिंग गतिविधि पर कोर्स की शुरुआत
नवंबर से लेकर फरवरी माह तक पौंग बांध क्षेत्र में साइबेरियन देशों के हजारों पक्षी मीलों का सफर तय कर पौंग बांध में अठखेलियां करने पहुंचते हैं। यहां आने वाले पर्यटक इन सुंदर पक्षियों निहारना चाहते हैं। ऐसे में स्थानीय लोगों को रोजगार शुरू करने को लेकर बर्ड वॉचिंग कोर्स शुरू करने की योजना इसके तहत विषय में रखी गई है। मसरूर के रॉक टेंपल व गुलेर मसरूर मंदिर कांगड़ा घाटी में पत्थर काट कर बनाए गए हिंदू मंदिरों का एक समूह है। यह आठवीं शताब्दी में शुरू किए गए इन मंदिरों के आरंभ में बनाए गए थे और धौलाधार पर्वतों की ओर मुख रख के खड़े हैं।

मंदिर उत्तर भारतीय नगर वास्तुशैली में बने हैं। इन मंदिरों को एक ही महान शिला से काटकर शिखरों के साथ तराशा गया था। वहीं गुलेर रियासत की दो सबसे बड़ी धरोहर नंदपुर का महल और हरिपुर का किला है। साथ ही हरिपुर, गुलेर और नंदपुर के ऐतिहासिक गांवों में एक रियासत ही नहीं एक सभ्यता के बस कर उजड़ने की कहानी है। हालांकि, इससे ही कांगड़ा घाटी लघु चित्रकला का नाम जाना जाता है। स्वदेश दर्शन योजना के तहत यहां के अनछूए पहलुओं को पर्यटन के साथ विकसित करने को लेकर भी स्थानीय युवाओं को रोजगार उपलब्ध करवाने पर फोक्स रहेगा।

स्वदेश दर्शन योजन के तहत जिला कांगड़ा में चयनित स्थलों में सर्वे शुरू कर दिया गया है। छह सदस्यों की गठित टीम इस सर्वे में उन संभावनाओं को तलाश करेगी जहां इन पर्यटन स्थलों में अनछुए पहलूओं को विकसित कर स्थानीय लोगों और युवाओं को रोजगार से जोड़ा जाए। इसके बाद बजट और आगे की प्रकियाओं पर कार्य किया जाएगा।-विनय धीमान, जिला पर्यटन अधिकारी कांगड़ा।

 

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